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वर्ष: 1, अंक 7, जनवरी, 2017



हँस के बात कर

डॉ०अनिल चड्डा


समय है जो गुजरना तो हंस के बात कर, परेशनियाँ सभी को तू सर से उतार कर । सभी ने चोट खाई है कभी हयात में, कमज़ोर पड़ के अपने रास्ते न बंद कर। कर्म को कर लेना सीख, न होश तू गवाँ, भगवान तो नहीं मिलेंगे तुझको आन कर। उधार की है ज़िंदगी, उधार के हैं लोग, गँवाना न यूँ ही इसे, रखना संभाल कर। चले चल, चले चल, मिलेगी राह ख़ुद, न बैठ जाना थक के, दिल को हार कर।
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