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वर्ष: 1, अंक 7, जनवरी, 2017



धन्यवाद मित्रों !

अमरेन्द्र सुमन


पूरी संवेदनाओं के साथ अलग-अलग दौर में सहानुभूति रखने,सहयोग देनेवाले मित्रों धन्यवाद! स्कूल के दिनों में तहेदिल से शुक्रिया उन दोस्तों को पूरा का पूरा वक्त जिन्होंने मेरे लिये खर्च किया दुःख की घड़ी हो अथवा मुस्कुराहटों के पल उस एक दोस्त की भी जिसने साथ दिया भाई की तरह हर एक मुकाम पर नहीं जानने वाले प्रश्नों के हल ढॅूढ़ता रहा जो रात भर मेरे लिये कॉलेज के दिनों के दौरान कुछेक ऐसे अनाम मित्रों को भी धन्यवाद सायकिल की पीठ पर बिठा पहुँचा जाया करते थे जो घंटी पूर्व क्लासरुम आज के बाजारवाद में जबकि हर चीज बिकाउ व कम टिकाउ रह गयी है स्मरण के एलबम में कैद उस महिला मित्र को धन्यवाद पासकोर्स में इतिहास के नोट्स मुफ्त में उपलब्ध कराने की जिसने जहमत उठा रखी थी मेरे लिये
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