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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

बेरोज़गार युवक का प्रेम पत्र

अखतर अली

प्रिये

आज बहुत दिनों की प्रतीक्षा के बाद तुम्हारा पत्र मिला , उसे मैंने नियुक्ति पत्र की तरह सीने से लगा लिया , वांटेड काँलम की तरह एक ही सांस में पढ़ लिया | सोचता हूँ काश तुम मेरे को रोज़ एक पत्र लिखती तो कितना अच्छा होता पर तुम तो रोजगार कार्यालय की तरह साल में एकाध बार ही कृपा करती हो | प्रिये मै हमेशा यही सोचता हूँ हमारा यह पत्र व्यवहार का टेम्प्रेरी जाँब कब खत्म होगा और कब मेरे घर में तुम्हारी स्थायी नियुक्ति होगी ? आखिर मै कब तक तुम्हे दूर से ही देख देख कर निहारता रहूगा , इस डेली वेजेस वाले काम का कोई भविष्य नहीं होता है | एक बार मेरे को कोई परमानेंट जाँब मिल जाये फिर देखना मै अपने प्रेम का कोई काम पेंडिंग नहीं रखूगा , मेरे रोमांस की हर फाईल कम्प्लीट रहेगी , इसके लिए मेरे को कितना भी ओव्हर टाईम क्यों न करना पड़े मै राज़ी खुशी करुगा | मै वादा करता हूँ हमारी मोहब्बत का टेबल एक दम साफ़ सुथरा रहेगा उस पर कभी भी तनाव के कागज़ात बिखरे हुए नहीं मिलेगे |

प्रियतमा , मैंने कल रात तुम्हे सपने में देखा था , तुम बिलकुल चार अंको वाले वेतनमान की तरह नज़र आ रही थी | तुम्हारे बाल हवा में ऐसे उड़ रहे थे मानो उन्हें आज ही तनख्वाह मिली हो | तुम्हारी आँखे लोक सेवा आयोग के विज्ञापन की तरह चमक रही थी , जब मैंने तुमको स्पर्श किया तो ऐसा लग रहा था मानो सेलेरी रजिस्टर में दस्तखत कर रहा हूँ |

प्रिये , मैंने अपने संबंधो की एक ‟ प्रेम का रिश्ता ” नाम से एक फाईल खोल ली है उसमें मै तुम्हारे पत्रों को फ़ाईल करते जा रहा हूँ , सोचता हूँ यदि कल को तुम्हारे पापा ने समाचार पत्रों में लघु विज्ञापन छपा दिया कि – एक पढ़े लिखे समझदार युवक की पति कार्य हेतु शीघ्र आवश्यकता है , अनुभवी युवक को प्राथमिकता दी जाएगी , लिखे या मिले ...... डियर उस वक्त तुम्हारे यही पत्र मेरे लिए एक्सपीरियंस सर्टिफ़िकेट का काम करेगे फिर इस पद के लिये मेरा चयन करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकेगा | लेकिन यह तो बाद की बात है आज की बात तो यह है कि मै जब भी तुम्हारे पापा की ओर आशा भरी दृष्टि से देखता हूँ तो उनके चेहरे पर नो वेकेंसी का बोर्ड टंगा नज़र आता है |

जानम , पत्रों के माध्यम से प्रेम करना वाउचर पेमेंट पर नौकरी करने के सामान है | इस में न तो प्राविड़ेंड फंड का आलिंगन है न केजुअल लीव का चुंबन | प्रेम के नाम पर तुम बस महीना पन्द्रह दिन में एक बार छत से खड़े होकर एक हल्की सी मुस्कान बिखेर देती हो इससे अधिक कुछ नहीं | तुम्ही सोचो क्या सिर्फ़ बेरोजगारी भत्ता मिल जाने से ज़िंदगी गुज़र सकती है ? यह तो बहुत अच्छी बात है कि सरकार ने केवल नौकरी के लिये ही आयु सीमा निर्धारित की है शादी के लिये नहीं वरना नौकरी के चक्कर में शादी की उम्र भी निकल जाती |

डियर अभी मै नौकरी की तलाश में व्यस्त हूँ इसलिये तुम्हारी ओर विशेष ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ , आशा है इसे तुम अन्यथा नहीं लोगी | बस एक बार सरकारी नौकरी मिल जाये फिर देखना रोज़ रजिस्टर में दस्तखत कर तुमसे मिलने आ जाया करुगा | महीने में दो एक सी. एल . मार दिया करुगा | तुम जब भी कहोगी मेडिकल लीव लेकर तुम को घुमाने निकल जाउगा | ऐरिअस का एक एक पैसा तुम्हारे शौक पूरा करने में ही खर्च करुगा | यही सब कारण है जो मै सरकारी नौकरी ही करना चाहता हूँ क्योकि प्रायवेट नौकरी एक ऐसी नौकरी है जिसमें काम भी करना पड़ता है |

मेरे को इस बात का पूरा अहसास है कि मैंने आज तक तुम्हे उपहार स्वरूप कुछ भी नहीं दिया है सो मैंने निर्णय लिया है कि मै अपनी पहली तनख्वाह से तुमको ‘रोजगार समाचार‘ की प्रति भेट करुगा | उसके एक एक शब्द में तुम्हे मेरा आस्तित्व नज़र आयेगा इसे तुम हमेशा अपने सीने से लगाये रखना | तुम्हारे बाद मुझे सब से अधिक कुछ प्रिय है तो वह रोज़गार समाचार ही है | इसका एक एक अक्षर मेरे को उर्जा प्रदान करता रहा है , इसमें छपे एक एक विज्ञापन मुझे आशा की एक नई किरण प्रदान करते रहे है | मै जब भी आफिशयली टूर पर निकला रहू और तुमको मेरी याद आये तो तुम रोज़गार समाचार पढ़ लिया करना | उसके अंदर तुमको मेरा प्रतिबिंब नज़र आयेगा , इसे पढ़ने से दिल को एक राहत सी महसूस होती है | मेरे ऐसे सैकड़ो मित्र है जिनका जीवन रोज़गार समाचार के सहारे ही बीत रहा है , वे लोग सोने के लिये रोजगार समाचार को बिछा लेते है , ठंड लगे तो रोजगार समाचार को ओढ़ लेते है , नंगा बदन ढकना हो तो रोजगार समाचार को लपेट लेते है , भूख लगे तो इसी के टुकड़े निगल लेते है , और तन्हाई में इसका एक एक शब्द कई कई बार इस उम्मीद से पढ़ते रहते है कि न जाने इसके किस शब्द में उनका भविष्य छिपा हो |

प्रिये बस एक बार अच्छी सी नौकरी मिल जाये फिर देखना मेरा उत्साह | सुनते है शीरी को पाने के लिये फ़रहाद ने कुछ ही महीनो में दूध कि नहर खोद दी थी। यह तो कुछ भी नहीं , मै तुम को पाने के लिये कुछ ही दिनों में राशन कार्ड बनवा कर दिखा दूँगा | इसके अतिरिक्त तुम्हारे पापा जो भी परीक्षा लेना चाहे मै सब में सफ़ल होकर दिखा दूगा , बस नौकरी मिलने कि देर है , प्रिये मेरे को नौकरी कब मिलेगी ?


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