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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी : काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय में सम्पन्न

हम शिक्षित तो हो रहे हैं पर सुशिक्षित नहीं-प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय (कुलपति)

10 एवं 11अक्टूबर,2020 को हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन,आचार्यकुलम ,नीदरलैंड एवं काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय, आसनसोल (पश्चिम बंगाल) के तत्वावधान में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया| यह संगोष्ठी चार सत्र में सम्पन्न हुई| चारों सत्र में चार भिन्न-भिन्न विषय थे, जिसमें चार प्रमुख रचनाकारों, मनीषियों-- हम सब के बापू महात्मा गांधी, नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ,राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर और क्रांतिकारी रचनाकार काज़ी नज़रुल इस्लाम जी को केंद्र में रखकर सभी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए| कुछ शोधार्थी , प्रोफेसरों एवं शिक्षकों द्वारा इस विषय से संबंधित शोध पत्र वाचन किया गया|साथ ही साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि कवयित्रियों ने अपने कविता पाठ द्वारा श्रोताओं को भावविभोर कर दिया| काव्य पाठ का ऐसा समां बांधा कि श्रोतागण की श्रवण लालसा तृप्त ही नहीं हो रही थी|

जैसा कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम सत्र का विषय रहा -'भारतीय शिक्षा स्वालंबन एवं संस्कृति का दर्शन' जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित माननीय कुलपति प्रोफ़ेसर सोमा बंद्योपाध्याय जी (कुलपति,शिक्षक प्रशिक्षण शिक्षण योजना एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय,कोलकाता एवं संस्कृत कॉलेज एवं विश्वविद्यालय) ने सभी महापुरुषों रचनाकारों की शिक्षा संबंधी विचारों से अवगत कराते हुए यह बताया कि हम शिक्षित तो हो रहे हैं पर सुशिक्षित नहीं हो रहे हैं साथ ही कहा कि शिक्षा ज्ञान आधारित ना होकर आचरण आधारित होनी चाहिए| शिक्षा ना केवल विभिन्न कौशलों का विकास करें बल्कि चरित्र का गठन भी करें और श्रेष्ठ जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें तैयार करें| साथ ही साथ शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो इस बात पर भी उन्होंने बल दिया | अध्यक्ष के रूप में उपस्थित काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफ़ेसर साधन चक्रवर्ती जी ने सभी महापुरुषों के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए करते हुए उनके जीवन दर्शन को उन्होंने साझा किया |

द्वितीय सत्र जिसका विषय-' संस्कृत भाषा और साहित्य' जिसमें विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफ़ेसर विजय कुमार भारती जी(अधिष्ठाता,कला संकाय,काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय, आसनसोल) ने क्रांतिकारी कवि काज़ी नज़रुल जी के गीत एवं कविताओं के विविध रूपों भाव, शैली, शिल्प की चर्चा करते हुए कुछ नए आयाम प्रस्तुत किए | उन्होंने नज़रुल जी की भाषा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया साथ ही साथ नज़रुल जी को महान काव्य- परंपरा की कड़ी के रूप में स्थापित भी किया| मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर अर्जुन चव्हाण जी(पूर्व अनिष्ठाता,शिवाजी विश्वविद्यालय,कोल्हापुर) ने साहित्य, भाषा एवं संस्कृति पर अपने विचार प्रकट किए साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम सभ्यता वाले कैसे भारतीय संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं| संयुक्त परिवार ही हमारी संस्कृति का वाहक है, एकल परिवार के दुष्प्रभाव पर भी ध्यान केंद्रित कराया |वैश्वीकरण के अवसर के साथ-साथ उसके खतरे पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय संस्कृति की व्यापकता तथा भारत अपने साहित्य, भाषा एवं संस्कृति के कारण किस तरह से विश्व गुरु का गौरव प्राप्त किए हुए हैं| अध्यक्ष के रूप में उपस्थित श्री राज हीरामन जी(सुप्रसिद्ध,वैश्विक लेखक,मॉरीशस) ने शिक्षा और गांधीजी के विचारों को साझा किया साथ ही गांधी जी जब मॉरीशस गए थे तो उस घटना को केंद्र में रखकर बहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी दी| उन्होंने कहा कि गांधी जी की शिक्षा हमारे लिए आजादी है| गांधीजी ने शिक्षा और राजनीति में जाने के लिए प्रेरित किया साथ ही साथ उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी कवि नज़रुल कबीर से बहुत प्रभावित थे तथा वर्तमान समय मेंकवि नजरुल के और अत्यधिक मूल्यांकन की आवश्यकता है इस बात पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया| साथ ही उन्हें बांग्ला भाषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि बांग्ला भाषा नीति होने के साथ-साथ संघर्षशील और क्रांतिकारी भाषा है|

तीसरे सत्र का विषय-' नारी अस्मिता,संस्कृति और साहित्य' जिसमें नीदरलैंड्स से उपस्थित डॉक्टर पुष्पिता अवस्थी जी(अध्यक्ष आचार्यकुलम,हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन नीदरलैंड्स) ने गांधी जी के विचारों से अवगत कराया साथ ही साथ उन्होंने विश्व की विभिन्न संस्कृतियों को भारत की परंपरा से जोड़ते हुए हमें क्या-क्या करना चाहिए इस बात से भी परिचित कराया| वर्तमान में करोना महामारी की स्थिति को गांधी के सूत्र वाक्य से जोड़ते हुए जीवन जीने का मार्ग भी बताया| उन्होंने गांधी जी के जीवन शैली को विभिन्न स्तर पर समझाया| स्वाधीनता आंदोलन के समय साहित्य संस्कृति ने जो मूल्य स्थापित किए वह विश्व स्तर पर कितने महत्वपूर्ण रहे इस बात का भी हमें ज्ञान कराया| साथ ही उन्होंने गांधीजी की प्रसंगिकता को दर्शाते हुए कहा कि आज गांधी जी का कोई विकल्प नहीं है आज राजनीति का जो वायरस फैला जा रहा है वह करोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है| तीसरे सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित जी(पूर्व अधिष्ठाता, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने नारी के विविध रूपों को जीवन के हर पहलू से जोड़कर अपने विचार प्रस्तुत किए | लैंगिक भेदभाव को दूर होना चाहिए इस बात पर उन्होंने विशेष बल दिया| हिंदी साहित्य में भी प्राचीन काल से लेकर आज तक की नारियों के विभिन्न योगदान को बहुत सारे उदाहरणों द्वारा उन्होंने प्रस्तुत किया| विभिन्न महापुरुषों के जीवन व्यक्तित्व के विकास में नारी की भूमिका को उन्होंने सराहा |प्राचीनकाल की नारियों की प्रशंसा करते हुए यह भी बताएं कि आज पुरुष प्रधान समाज में उनके अधिकार कैसे छीन लिए गए हैं| पर्दा- प्रथा, बाल- विवाह, सती- प्रथा जैसी कुप्रथा समाज में कैसे और क्यों किन कारणों से आए इसका भी उन्होंने ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत किया| समाज में ये सब कब और कैसे शुरू हुआ इसके पीछे के कारणों को भी उन्होंने बताया| वर्तमान में नारी का संस्कृति से संबंध को भी समझाया |सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षक नारी ही है इस बात को उन्होंने विभिन्न उदाहरणों द्वारा प्रस्तुत किया|

चतुर्थ एवं समापन सत्र का विषय--' हिंद स्वराज और सत्य के प्रयोग' जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित डॉक्टर संदीप अवस्थी जी(शिक्षाविद,आलोचक और अध्यक्ष भारतीय विद्या अध्ययन केन्द्र, उपाध्यक्ष,आचार्य कुलम भारत,हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन, नीदरलैंड्स) ने हिंद स्वराज और सत्य के प्रयोग पुस्तक की सराहना करते हुए यह बताया कि यह पुस्तक निराशा के क्षण में आशा की ज्योति जगाने वाली है| गांव में स्वालंबन के विभिन्न अवसरों- रोजगारों की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया |धनार्जन के साथ धन के सही सदुपयोग की चर्चा की |विद्यालय-महाविद्यालय के छात्रों को एस. यू.पी. डब्ल्यू और एन.एस.एस के माध्यम से विकास के कितने अवसर प्रदान किए जा सकते हैं यह भी उन्होंने परिचित कराया| गांधी जी के सिद्धांतों को जीवन में अमल कर अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं इसकी भी उन्होंने चर्चा की| मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉक्टर विजय राणा जी (बी.बी.सी के वरिष्ठ अधिकारी, इंग्लैड) ने इस बात से अवगत कराएं कि गांधीजी एक पत्रकार के रूप में कितने सफल रहे| उन्होंने एक पत्रकार के रूप में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की| गांधीजी के विचारों में नवीनता थी गांधी जी को किसी वाद में बांधना उचित नहीं है क्योंकि हमेशा से वे लगातार स्वतंत्र विचारों, सत्य के साथ जुड़े रहे| नए -नए प्रयोगों से यह वे गतिशील रहे |आज गांधी जी को कुछ सीमित वादों में बांधना उचित नहीं है| गांधीजी के विभिन्न विचारों से भी अवगत कराया जिसमें मूल रूप से अहिंसा, ग्रामोत्थान, शिक्षा सर्वधर्म- समभाव पर विशेष बल दिया|चतुर्थ सत्र के अध्यक्ष के रुप में उपस्थित प्रोफ़ेसर के.एल वर्मा जी(कुलपति,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़) ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए हम सब का उत्साहवर्धन कराया| साथ ही साथ गांधीजी के महत्वपूर्ण पुस्तक को पढ़ना चाहिए इस पर भी उन्होंने विशेष बल दिया| उन्होंने कहा कि जिसमें न केवल स्वयं का बल्कि समाज का भी कल्याण होगा| वर्मा जी ने चतुर्थ सत्र के सभी वक्ताओं की सराहना करते हुए गांधी जी की प्रासंगिकता को स्थापित किया| राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए शिक्षा संबंधी गांधी जी के विचार आज भी कैसे प्रासांगिक है यह भी बताया|दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी के समापन के कगार पर एक बहुत ही सुंदर बहुभाषीय अंतरराष्ट्रीय काव्यधारा में काव्य पाठ की प्रस्तुति की गई जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि और कवित्रीयों यों ने अपनी कविताओं, गज़लों एवं गीतों के माध्यम से जिस तरह का समा बांधा सारे श्रोतागण जो थे वह रस- भाव विभोर हो गए |इस अंतरराष्ट्रीय काव्य पाठ में मुख्य रूप से रितु प्रिया जी, जय वर्मा जी, दर्शन पुरोहित जी, पुष्पिता अवस्थी ,जी, प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय जी, अशोक अंजुम जी, डॉक्टर संदीप अवस्थी जी, और इस काव्य धारा के अध्यक्ष श्री गिरीश पंकज जी ने भी अपनी कविताओं से जो एक अद्भुत समा बांधा वह सचमुच ही सराहनीय है |इस काव्य पाठ के अध्यक्ष के रूप में उपस्थित श्री गिरीश पंकज जी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए सभी कवि और कवित्रियों की रचनाओं का मूल्यांकन भी किया साथ ही साथ उत्साहवर्धन भी उन्होंने किया |सबसे पहले रितु प्रिया जी ने गांधी जी पर बहुत सुंदर काव्य प्रस्तुति की साथ ही पारंपरिक लोक धुन में अपनी मधुर वाणी से एक बहुत ही सुंदर गीत गाया जो लोगों के कानों में मिश्री घोल दिया ऐसा लगा कि हम घर बैठे बैठे फिर से त्रेतायुग में पहुंच गए हैं| जय वर्मा जी ने शांति दूत नेल्सन मंडेला पर बहुत सुंदर काव्य पाठ किया |साथ ही उन्होंने आदमी का काम चलते रहना उनकी यह कविता हर परिस्थिति में प्रेरणा देती है| दर्शन पुरोहित जी ने भूल नहीं पाता सरावोर सावन से हम सबको अश्विन मास में सावन से सराबोर कर दिया| पुष्पिता अवस्थी जी ने नदी अपनी तरह से कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया| प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय जी ने काजी नज़रुल की कविता से काव्य पाठ का आरंभ किया, क्यों कविता गंभीर कविता द्वारा समा को एक नया रूप दिया| नारी के विभिन्न संवेदना प्रस्तुत की उन्होंने और इस गंभीर वातावरण में फिर अशोक अंजुम जी ने अपने व्यंग्य कविताओं, ग़ज़लों एवं गीतों से एक अलग ही समा बांध दिया| उनकी कविता सच और झूठ आज के युग में अद्भुत दिशावर्धक कविता है| लोकतंत्र पर आधारित बहुत सुंदर गीत का गायन किया | उन्होंनेबहुत अच्छे-अच्छे व्यंजन गीतों ग़ज़लों का गायन इतना सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया कि काव्य का एक अनोखा रूप भी हमें गजलों के माध्यम से सुनने को मिला |संदीप अवस्थी जी ने रेहान जेबरी की पीड़ा को कविताओं में किस तरह से अभिव्यक्ति दी |बहुभाषीय अंतरराष्ट्रीय काव्य-धारा के अध्यक्ष श्री गिरिश पंकज जी ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से एक अलग समा बांधा | स्त्री की समस्याओं के पक्ष में एक नया कानून बनना चाहिए इसके लिए भी उन्होंने यह प्रस्ताव रखा |और अंत में काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय के कला संकाय के डीन प्रोफेसर विजय कुमार भारती जी ने धन्यवाद ज्ञापन की औपचारिकता ही नहीं की बल्कि इस दो दिवसीय वेब संगोष्ठी से जुड़े सभी वक्ताओं, शोध आलेख प्रस्तुतकर्ता, कवि कवित्रीयों विशेषकर मुख्य संयोजक डॉ संदीप अवस्थी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की सफलता और समापन की घोषणा की|इस संगोष्ठी में गूगल मैप पर और यूट्यूब चैनल पर बहुत सारे लगभग बारह सौ के करीब दर्शक उपस्थित रहें और सात देशों में इसकी प्रस्तुति की गई और कई तरीकों से कई लोगों ने इस संगोष्ठी की सफलता को सराहा, प्रशंसा की| हम सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं धन्यवाद|



प्रतिवेदन लेखक--

डॉ.काजू कुमारी साव
असिस्टेंट प्रोफसर
हिन्दी विभाग
काज़ी नजरूल विश्वविद्यालय(आसनसोल)
email: kaju.shaw12@gmail.com


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