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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

मौसम बदल रहा है...

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

नया है वक़्त और मौसम बदल रहा है देखो कुछ दिन से मौसम बदल रहा है अनवरत चलने लगी है शीत हवाएं रौशन हैं जिनसे मौसम बदल रहा है बर्फ की चादर ओढ़ बैठी है ये घाटी चाँदी के चिन्ह से मौसम बदल रहा है लोग अपने घरों में लुत्फ़ उठाने लगे रम और ज़िंन से मौसम बदल रहा है हर कोई अपने हिसाब में व्यस्त हुआ कहें हम किनसे मौसम बदल रहा है खाने-पीने के शौकीन लोगों का मौका गर्म - किचन से मौसम बदल रहा है बदलाव ज़िन्दगी में जरुरी है "उड़ता" नभ-जमीन से मौसम बदल रहा है

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