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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

स्वस्ति स्वस्ति

शुचि'भवि'

पच्चीस हज़ार या ढाई करोड़?

पापा,आप भी ग़ज़ब करते हैं, कितने डॉक्टरों के पास और चलना है?

आप स्वस्थ हैं अभी,मगर आज ये सत्रहवाँ डॉक्टर है जिनके पास आपको ले जा रहा हूँ।

खीझते हुए सुजय ने अपने पिताजी से पूछा था।

बेटे, मैं उम्र के उस पड़ाव पर हूँ जहाँ डॉक्टर की ज़रूरत कभी भी हो सकती है।तुम तो आलू भी ख़रीदते वक़्त चार दुकान देखते हो, फिर मैं कैसे अपने जीवन की डोर किसी भी डॉक्टर के हाथों में सौंप दूँ?

तुम्हारे तबादले के बाद यह ही तो सबसे ज़रूरी काम है इस नए शहर में जो मुझे सर्वप्रथम करना है।

मगर पापा, हर डॉक्टर से मिलकर आप पूछते क्या हैं? कैसे उनको रिजेक्ट कर देते हैं?आप मुझे भी अपने साथ भीतर लेकर नहीं जाते । मुझे ये सब कुछ समझ नहीं आ रहा है।

सुजय बेटे, बहुत सरल है किसी डॉक्टर को पहचानना। मैं बस उनसे ये पूछता हूँ कि उन्होंने एम.बी.बी.एस. पच्चीस हज़ार में किया या ढाई करोड़ में?


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