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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

जीवन के रंग हजार

रीता तिवारी "रीत"

कहीं प्यार कहीं तकरार, जीवन के हैं रंग हजार| कहीं भंवर रिश्तो का देखो, उलझा हर इंसान है| जिसको देखो वही परेशा, जीवन से हैरान है| कहीं निराशा के हैं बादल, कहीं आशा का संचार है| लोभ ,मोह, लालच में पड़कर, उलझा हर इंसान है| इस जीवन का ओर नहीं ना, कोई परिभाषा है| बढ़ते रहे कर्म पथ पर हम, भाव जगाती आशा है| जीवन में हर रंग भरो तो, ही जीवन सुंदर होगा| " रीत" कहे गर समझ गए तो, सतरंगी जीवन होगा|

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