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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

एक जनवरी आयी

राजेन्द्र वर्मा

जींस-टॉप कुहरे के डाले एक जनवरी आयी । महल-अटारी पर न्योछावर बिजली वाले लट्टू अपनी बस्ती के खम्भों में लटके बल्ब निखट्टू जलते टायर के कौड़े से एक जनवरी आयी । अम्मा को गठिया ने जकड़ा, बापू को जूड़ी ने नींद उड़ा रक्खी भैया की जवां हुई बेटी ने शिक्षा-ऋण की नोटिस लेके एक जनवरी आयी । दो पैसे की बचत नहीं, पर खेती तो करनी है केसीसी की किश्त पुरानी कैसे भी भरनी है आलू पर पाला बरसाने एक जनवरी आयी ।


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