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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 100, जनवरी(प्रथम), 2021

दिल लगा के भइलन ऊ परदेशी

विद्या शंकर विद्यार्थी

दिल लगा के भइलन ऊ परदेशी दिल लगा के गइलन ऊ हरमेशी घर कहे के लागत घर अब बाटे दिल चुरा के गइलन ऊ परदेशी फूंक दिहलन बाचल घर के कोना लोर मन में दिहलन ऊ हरमेशी पीर लेके आइल बा बढ़ियारा घर जरा के गइलन ऊ हरमेशी चाह के सपना ना सोराइल अब बात गढ़ के गइलन ऊ हरमेशी ।

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