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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

धरना हटाने की विधि

सुरेश सौरभ

राजा शेर घोर चिन्ता में उदास बैठा था। उसने अपने खास मंत्री फेंकू सियार को बुलवाया था। फेंकू ने आते ही राजा से जय श्री राम करके चिन्ता का कारण पूछा।

राजा उदासी भरे लहजे में बोला-बहुत दिनों से ये धरना प्रदर्शन करने वाले लोगों ने मुझे बहुत परेशान करके रखा है। जब देखो कोई न कोई धरना -प्रदर्शन करके अपनी मांगों को मनवाते रहतें हैं।उनके इस रवैये से, मैं अपने भोग-विलास की मनमानी शर्तें राज्य में लागू नहीं कर पा रहा हूं। सियार ने कुटिल मुस्कान बिखेर कर कहा-धरना-प्रदर्शन को खत्म करने का मेरे पास बहुत आसान उपाय है। शेर ने अधीरता से कहा-अरे!यार जल्दी बताओ।

सियार-महराज तो सुनिए,अगर छोटा धरना है, तो उस पर आम जनता का रास्ता रोकने, जनता को बहुत परेशान करने का आरोप लगाकर, उसे जबरदस्ती पुलिस के डंडो से हटवा दो। बड़ा धरना हो, तो उसमें अपने भाड़े के दंगाई भेज कर दंगा भड़का दो। मजबूरी में धरने वाले खुद-ब-खुद भाग जाएंगे।

शेर-अगर हजारों लोगों का धरना प्रदर्शन का हुजूम हो तो?

सियार-बहुत आसान है हटाना, वहां सम्प्रदायिक दंगा कराओ। अपने आदमियों को भेज कर राष्ट्रीय सम्पत्तियों का नुकसान करा कर, और उसका आरोप धरना करने वालो पर लगा कर पुलिस से उन पर लाठी चार्ज करवा दो, आंसू गैस छुड़वा दो अगर फिर भी वो ज्यादा उग्र हो तो उन पर गोली चलवा दो।

शेर-पत्रकार साजिशें जान गये तो।

सियार-नो टेन्शन, पत्रकारों को पहले ही खरीद लो महराज! फिर आप पत्रकारों से यही कहें कि राष्ट्रीय एवं सरकारी सम्पत्तियों का दंगाई और अराजक तत्व बहुत नुकसान कर रहे थे। इसलिए उन्हें खदेड़ा गया।

शेर-फिर भी कुछ पत्रकार न बिके तो?

सियार-मुझे उम्मीद है सौ में से पिन्चानबे तो बिक ही जाएंगे। पांच परसेन्ट में दो तीन परसेन्ट तो आप की, आप के भक्तों की धमकियों से डर कर खामोश हो जाएंगे। एक-दो परसेन्ट लिखतें हैं तो लिखते रहें, जब पूरे बहुमत से आप की सरकार है तो कोई आप का क्या बिगाड़ लेगा। फिर भी ज्यादा लिखें तो देशद्रोही का फर्जी मुकदमा करके उन्हें जेल में ठूंस दो। किस्सा सारा खल्लास।

अब शेर खुशी से अपनी मूछों पर हाथ फेरने लगा।


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