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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

लीजा़ डायपर्स में ही दौड़ ली

महेश चंद्र द्विवेदी

मोहब्बत में गर दीवानगी न हो तो मोहब्बत ही क्या? तवारीख के पन्नों को पलटकर देखिये तो आप पायेंगे कि इस जहां में ऐसा कोई मुल्क नहीं है ओर न ऐसा कोई वक्त गुज़रा है जब मोहब्बत में लोगबाग दीवाने न हुए हों। और दीवानगी भी कोई ऐसी वैसी नहीं बल्कि खु़द से लेकर मुल्के आदम को खा़क कर देने वाली दीवानगी। दीवानगी-ए-मोहब्बत की दूसरी खुसूसियत यह है कि यह अमीर और ग़रीब, हुक्काम और ख़ादिम, जवान और ज़ईफ़ किसी में फ़र्क नहीं करती है और कमोबेश सबको अपना शिकार बनाती है। कहीं मियां मजनू अपना पुराना कुर्ता फाड़कर गली में खेलने वाले बच्चों से अपने उूपर पत्थर फिंकवाते फिरते हैं, तो कहीं सोहनी और महिवाल बेताबी में कच्चा घड़ा पेट में बांधकर उफ़नती नदी में कूद पड़ते हैं, तुलसीदास जुनून में सांप को ही रस्सी समझकर छत पर चढ़ जाते हैं, क्लियोपाट्रा को पाने के लिये रोम का सीज़र अपनी पूरी सेना झोंक देता है, तो एडवर्ड एर्थ अपनी तलाकशुदा माशूका मिस सिम्प्सन हेतु ब्रिटिश साम्राज्य की राजगद्दी पर लात मार देता है। पर नासा में काम करने वाली सांइंसदां लीज़ा नोवाक ने जो जुनून दिखाया, वह इन पुराने आशिकों के कारनामों से न सिर्फ़ जुदा बल्कि ज़्यादा काबिलेतारीफ़ भी था। तीन बच्चों की मां पैंतीस साल की लीज़ा नासा में ही काम करने वाले उन्चास साल के एक ऐस्ट्रोनौट को दिल दे बैठी। बाद में उसे पता चला कि वहीं काम करने वाली कोलीन भी उसके माशूक पर फ़िदा हैं। बस फिर क्या था- वहीं से शुरू हो गयी दो फ़िदायीन आशिकों में रक़ाबत की जंग। लीज़ा एक रात जब हूस्टन, जो नासा से 1450 किलोमीटर दूर है, में थीं तो उसे अपने ‘मुखबिर’ से पता चला कि उसका माशूक जिस हवाई जहाज़ से नासा से न्यूयार्क के लिये रवाना होने वाला है, कोलीन ने भी अपना टिकट उसी हवाई जहाज़ पर कटा लिया है। फिर क्या था लीजा़ का पोर पोर दहकने लगा और उसने फ़ौरन से पेश्तर गैराज खोलकर अपनी कार निकाली और नासा जाने वाले हाईवे पर उसे सरपट दौड़ा दिया। अपनी जान पर खेलकर उसने 1450 किलोमीटर तक गाड़ी बिना कहीं रुके धुंआंधार चलाई और एयरपोर्ट पर कोलीन के हवाई जहाज़ पर चढ़ पाने के पहले ही उसे पकड़कर उसकी बेमुरव्वत और बेतहाशा धुनाई शुरू कर दी। मोहब्बत की दुश्मन पुलिस चाहे कत्ल के मौके पर समय से पहुंचे या न पहुंचे, पर जुनूने-इश्क के ऐसे नायाब प्रदर्शन के मौके पर आनन फानन में पहुंच गई। औैर पुलिस वालों ने आकर लीज़ा के हाथों में हथकडी़ डाल दी। लीज़ा को इस गिरफ़्तारी का कोई अफसोस नहीं हुआ क्योंकि वह कोलीन की फ़्लाइट मिस करवा चुकी थी। पुलिसवालों ने लीज़ा को जब पकडा़ तो वे यह देखकर न सिर्फ़ हैरान रह गये बल्कि उनकी आंखें भी जुड़ा गईं कि लीज़ा धड़ के नीचे सिर्फ़ डायपर्स पहने थी। इसलिये और कुछ पूछताछ करने के पहले पुलिसवालों ने उससे सवाल किया कि वह वहां डायपर्स में क्यों आई? वैज्ञानिक लीज़ा ने इसका बहुत ही ‘वैज्ञानिक’ कारण बताकर पुलिस की बोलती बंद कर दी, ‘‘जिससे हूस्टन से नासा के लम्बे रास्ते में किसी तरह की हाजत से फा़रिग होने के लिये मुझे बाथरूम जाकर समय न गंवाना पड़े।’’ मेरी नाकिस राय है कि दूसरे आशिकों को इस साइंसदां आशिक से जुनूनें-आशिकी के ऐसे ‘वैज्ञानिक’ गुर सीखने चाहिये।


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