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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

जब से प्यार करना छोड़ दिया

डॉ० अनिल चड्डा

जब से प्यार करना छोड़ दिया ज़िंदगी को नया मोड़ मिला जो भी रिश्ता मतलबी लगा, बिन सोचे उसको तोड़ दिया। कोई तो पूछता हमसे कभी, क्यों ग़म से नाता जोड़ लिया। सँवार कर रखी थी ज़िंदगी, सादगी ने था झिंझोड़ दिया। जवाँ कब तक रहती हसरतें, ठोकरों ने था सब निचोड़ लिया।

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