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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

दे कर जाएगी...

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

दुनियां खूबसूरत है तेरा चैन ले कर जाएगी सब दुनियादारी है कुछ तुझे दे कर जाएगी दिली भीतरी हर ख़ुशी का राज़ तेरे पास है इश्क़ कर सबसे कोई कहीं नेह' कर जाएगी (लगाव) वैसे कबसे तू भला ईमानी रहगुजर पे है देखता जा तक़दीर बरसते भे' कर जाएगी (गीला ) क़ीमती है बहुत इस ज़माने की सब रवायतें है पाँच अंश अपने आपके ये छे कर जाएगी "उड़ता"समेट ले बाद में सब कै' कर जाएगी(उल्टी ) दुनियां खूबसूरत है तेरा चैन ले कर जाएगी

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