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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

फिर आया मधुमास

रीता तिवारी "रीत"

प्यार का आया बसंत, खिल गए हैं दिग दिगंत| खेतों में सरसों की कलियां, लेकर आई फिर बसंत| प्यार की चली फिर हवा ,आ गया मधुमास है| प्रकृति में अनुराग भरने, आया बनकर आस है| मन के सोए ख्वाब जागी, प्रीत की कलियां खिली| वाटिका फूलों से भर गई, बसंती हवा चली| अब बसंती हवा देखो, प्रीत बनकर छा गई| अब मुझे तनहाइयों में, याद तेरी आ गई| कोपलें आने लगी है ,डालियों में फिर नई| मन में फिर उन्माद जागा, मिलन की आहट हुई | "रीत" के जीवन में फिर से, प्रीत की जगी आस है| आस बन कर छा गया है, फिर से यह मधुमास है|

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