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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

वसंत तुम्हारे स्वागत में

डॉ. पवनेश ठकुराठी

कोयल चहकी हवाएँ बहकी बसंत तुम्हारे स्वागत में। किरणें चमकी घटाएँ दमकी बसंत तुम्हारे स्वागत में। आंखें महकी सांसें दहकी बसंत तुम्हारे स्वागत में।


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