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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

कुछ पल

डाॅ.महिमा श्रीवास्तव

कुछ पल जिनमें पूरा जीवन सिमट आता। कुछ पल जिनके नाम पूरा जीवन हो जाता । कुछ पल फिर कभी जो लौट के ना आते फिर भी मन उनको बार बार झोली में अपनी भरता जाता। वीणा के तार से चित्त को झंकृत करते। जुगनु से वो जगमग मन के वन में दमकते गुलाबों से वो पल श्वासों में महकते रहते समय की तलैया में कमल से खिले रहते चांदनी से वो पल गुफ्तगू करते ही रहते।


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