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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

हे शारदे माँ

डॉ. पवनेश ठकुराठी

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, ज्ञान और विनय का वरदान दे माँ। हम हैं अज्ञानी, नादान बालक हमको समझ का विज्ञान दे माँ। हे शारदे माँ, हे शारदे माँ। उलझे हुए हम भवजालों में हमको सुलझते अरमान दे माँ। हे शारदे माँ, हे शारदे माँ। ठुकराये हैं हम, दुनिया के द्वारा चरणों में अपने, स्थान दे माँ। हे शारदे माँ, हे शारदे माँ।

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