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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 103, फरवरी(द्वितीय), 2021

छुट्टी का दिन

कृष्णलता यादव

लो छुट्टी का दिन है आया हल्ला-गुल्ला संग है लाया। निकल पड़ी बच्चों की टोली साथ लिए सारे हमजोली।। लकड़ी वाली लिए पिटारी नटखट मुन्नू बना मदारी। बना जमूरा चुन्नू भाई अच्छी खासी भीड़ जुटाई।। नए-नए करतब दिखलाए संगी-साथ खूब हँसाए। चुन्नू-मुन्नू तुम्हें बधाई छुट्टी की भी हुई विदाई।।


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