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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 79, फरवरी(द्वितीय), 2020

नए साल का जश्न

राजीव कुमार

मानसी के लिए नए साल के जश्न का महत्व सिर्फ ’हैप्पी न्यु ईयर ’ बोलने तक ही रहा गया था। खुशियों की पार इच्छाएं होते भी, जश्न की संभावनाएं नदारद थीं। हर साल की तरह उसका पति नए साल की मुबारकबाद देने के बाद अत्याचार की झड़ी लगा देता। मानसी जब भी अपनी मन की बात किसी को बताती तो सिर्फ यही दिलासा मिलता कि’ सब ठीक हो जाएगा।’ इस साल मानसी ने नए साल के जश्न की कोई तैयारी नहीं की। यहां तक की पति के द्वारा तीन बार विष दिए जाने के बाद भी मानसी ने कोई जवाब नहीं दिया। मानसी की घुटन उसी आँखों से व्यक्त हो रही थी। उसको यह भी मालुम था कि मेरा पति कभी सुधरने वाला नहीं है।

आज मानसी इस अफसोस में है कि मैंने नए साल का जश्न क्यों नहीं मनाया? अब उसका पति शारिरिक अत्याचार तो क्या, मानसिक अत्याचार भी भूल गया है। मानसी वाली घुटन अब उसके पति ने ले ली है।


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