Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 31,  फरवरी(द्वितीय), 2018



यह कभी नही ढलती !


सुदर्शन कुमार सोनी


हर व्यक्ति जवां बने रहना चाहता है । इसके लिये वह तरह तरह के उपक्रम करता है। जिम जाता है । मार्निंग वाक पर जाता है । गेम खेलता है , योगा करता है । पा्रणायाम करता है । खानपान पर ध्यान देता है। मालिश करवाता है ] फेशियल करवाता है । लिपोसक्शन करवा कर फैट कम करवाता है । बाल रंगता है , च्यवनपा्रश जैसी चीजों का सेवन करता है । विज्ञापनी जापानी तेल से मालिश करवाता होगा ! और न जाने क्या क्या पापड़ बेलता है । कुल मिलाकर इन सारी चीजों व आदतां से करार करने के पीछे वह बेकरार है कि जवानी दीवानी बरकरार रहे !

इस सबके बावजूद जवानी कायम नही रह पाती । एक दिन एैसा आता है। जब यौवन की हार और बुढा़पे की जीत हो जाती है । जब बत्तीसी के अधिकांश सदस्य नदारद हो चुके होतें हैं ।अखिंयो मे अंधेरा छाने लगता है । हाथ पैर कांपने लगते हैं । आवाज में कंपन होने लगता है । आदमी खुद भी बुढा़पे की इस भयावहता से कांप उठता है । लेकिन जब जवानी मे जलवे किये हैं तो बुढा़पे की भयावहता के तलवे तो चाटने पडेंगे !

लेकिन एक चीज है जो कि कभी बूढी़ नही होती। बल्कि दिन प्रति दिन और निखरती जाती है ! आदमी एक ओर दिन प्रतिदिन क्षीणं होता जाता है।लेकिन यह दिन प्रतिदिन और सुंदर मजबूत व ताकतवर होती जाती है ! यह आदमी को नचाती रहती है । यह एक मदारी है और आदमी बंदर है । वह जैसा चाहे वैसा आदमी को नचाती रहती है । गुलाटिंया खिलवाती रहती है और उसके बावजूद जैसे कि मदारी का बंदर गुलाटियां खाकर भी खुश रहता है वैसे ही इंसान भी मंहगाई की पटकनियां खाकर भी खुश रहता है !!

मंहगाई कभी कमजोर नही होती मतलब कम नही होती। कभी इसका यौवन नही ढलता। पता नही किस चक्की का पिसा आटा यह खाती है कि इसकी लचक दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है । इसका यौवन विदेशी मुदा्रओं डालर यूरों की विनिमय दरें बढ़ने पर और बढ़ता है । जमाखोरी कालाबाजारी। मुनाफाखोरी इसके लिये शिलाजीत की तरह बलदायी सिद्व होते है । यह बढ़ते समय एैसे बलखाती है कि सामने वाला मुंह की खाता है। यह गरीब के घर रोज झगडा़ करवाती है।

मंहगाई भेदभाव करती है। यह मध्यम वर्ग व गरीब को रूलाती है। लेकिन अमीर को इससे फर्क नही पड़ता है । वह तो यूकेलिप्टस की मानिंद मंहगाई मे भी अपने दौलत रूपी पेड़ की उंचाई बढ़ाता रहता है । अपने स्थापित व फल फूल रहे व्यापार उद्योग की जडो़ं को और गहरे फैलाकर मुनाफा रूपी पानी थोडा़ ज्यादा खींच मंहगाई की मार को कांऊंटर कर देता है। यह अटल है। शाश्वत है चिर यौवन से भरपूर है । बरसात के पूर तो मौसमी होते हैं । लेकिन इसकी बाढ़ के पूर तो साल भर आते रहते हैं । यह साल भर होने वाली बारिश है ! यह सदैव खिली खिली रहती है !

यह विनाश में/जलजले में और ज्यादा जलवे दिखाती है । जो चीज दो रूपये की मिलती है वह बीस की मिलती है । इसके कारण लोग झीना झपटी पर उतारू हो जाते हैं। एैसे समय इसकी इस मार रूपी यौवन का दंश किसी विष कन्या का जहर लगता है। कभी कभी जब पेट्रोल डीजल के दाम नाम मात्र को कम होते हैं तो हमे लगता है कि अब इसका यौवन ढलेगा लेकिन इससे इसको कोई फर्क नही पड़ता है। ये ही चाहे जब इसका दिमाग आसमान मे ले जाते हैं। कुछ दिन पहले हमने देख ही लिया कि यह एकदम से उछल गयी मचल गयी जब डीजल पेट्रोल के दामों ने एक साथ लम्बी छलांग मार दी ।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com