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वर्ष: 2, अंक 31,  फरवरी(द्वितीय), 2018



एयर में जो मारे लाइन, एयर लाइन


डॉ हरि जोशी


पंद्रह दिन बाद समझ में आया कि हमें उस एयर लाइन का धन्यवाद स्वीकार नहीं करना चाहिए था , जिसने हमारी कमर को आज तक टेढ़ा कर रखा है | लगातार एक ही मुद्रा में बैठे बैठे कमर फ्रैक्चरा गई है |जब हम विमान से बाहर निकल रहे थे तब तीन सुंदर चीनी एयर होस्टेसों ने समग्र दन्त पंक्ति के दर्शन कराते हुए मुस्कराहट के साथ हम दोनों , याने पति पत्नी को बिदा करते हुए कहा था “हमारी एयर लाइन से यात्रा करने के लिए धन्यवाद |”

हमने तब धन्यवाद इसलिए स्वीकार कर लिया था कि यह दर्द और शरीर में आई विकृति अस्थायी है |दो चार दिन में ठीक हो जायेगी |किन्तु हम आज भी कराह रहे हैं |फिजियोथेरेपी भी करा ली ,एक पहलवान से मालिश भी कराई ,कुछ योगासन भी किये पर सब कुछ व्यर्थ रहा |सड़क पर आते ही लोग पूछते हैं कैसे टेढ़े टेढ़े चल रहे हो ?

फिर खुद ही उत्तर भी देते “जो अधिक हवा में उड़ने लगता है ,टेढ़ा टेढ़ा चलने लगता है |”

अब उन्हें क्या बताएं ? इस हवा हवाई ने हमारी क्या गत कर दी है ?कभी कभी मंच पर चुनावी भाषण देने के बाद यदि नेता पिट जाये तो भी ऐसे ही चलता है |

लॉस एंजेलिस से ग्वान्जू की पंद्रह घंटे की यात्रा |इकोनोमी क्लास में भी यात्रा करके अपनी इकोनोमी बिगड़ गई | पंद्रह घंटे वायुयान में बैठे रहे , जिसमें न नहाने की सुविधा थी , न ठीक से सोने की |जेल में कई बार कैदियों को त्रास देने के लिए पल भर भी सोने नहीं दिया जाता , ऐसा ही कुछ उस वायुयान में था |बीच में दस मिनिट की झपकी लगी ही थी कि एक सहायिका ने झकझोरा “ क्या किसी चीज़ की ज़रुरत है ?” “मुझे गहरी नींद की ज़रुरत है ,इतना सा नम्र निवेदन है |एक घंटा कृपया बिलकुल डिस्टर्ब न करें ?”

मुझे थोड़ी नींद लगी ही थी कि उद्घोषक ने घोषणा की , हम ग्रैंड कैनियन के ऊपर से गुज़र रहे हैं |सुबह सुबह तीन बजे मेरी रूचि इसलिय जाग जाने की नहीं थी कि हम ग्रैंड कैनियन या ज़ोयन पार्क के ऊपर से गुज़र रहे हैं |क्या एयर लाइन को इन दर्शनीय स्थलों का प्रचार करने के लिए कुछ राशि दी गई है ?हमेशा ही यहाँ से गुजरने पर इनका नाम लेते हैं ?

मुझे मालूम है आपके कर्मचारी कितना कठोर श्रम करते हैं | आपने उन्हें नम्र और मुस्कुराते रहने के निर्देश दे रखे हैं , किन्तु वे उतने ही पागल हैं जितने आप |वे अच्छी तरह जानते हैं कि आप उनसे अधिक काम लेते हैं जो जोखिम उठाकर , जली कटी सुनकर भी यात्रियों की सेवा चाकरी करते रहते हैं , बदले में उन्हें क्या मिलता है ?यात्रिओं का असंतोष ? क्रुद्ध यात्री समूह से निपटते हुए भी वे मुस्कराते रहते हैं |

वे बार बार इस घोषणा को नहीं करना चाहते की आपकी यात्रा को सुखद और आनन्ददायी बनाने के लिए हमारी जो सेवा लेनी हो हम करने को तत्पर हैं | वे मौसम्बी ,टमाटर, सेव का रस , व्हिस्की, बीयर देने में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें यात्रियों के लिए समय देना मुसीबत से कम नहीं होता | आपकी एयर लाइन ने विज्ञापन किया था कि यात्री छुट्टियों के कारण बढ़ने वाले हैं,इसलिए जल्दी टिकिट सुरक्षित कर लें | मैंने ले लिया |वह पचास हज़ार का पड़ा |किन्तु तीन दिन बाद ही वह टिकिट आपने कुछ यात्रियों को चालीस हज़ार में भी बेचा है | यह जो दस हज़ार का घाटा हुआ है ,इसे कौन देगा ?मुझे क्या पता था , भाव ताव करने में आपने कुंजड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है |

हम आपकी एयरलाइन पसंद करते हैं किन्तु उसे पेसिंजर ट्रेन की यात्रा से तो बेहतर बनायें ?

“डेल्टा इज़ रेडी व्हेन यू आर”यह नारा डेल्टा लाइन ने दिया था |तो जब मैं टेक्सी से एअरपोर्ट जा रहा हूँ , काले दो बेग लेकर बीच रास्ते में हूँ तो बीच से ही मुझे डेल्टा एयर लाइन क्यों नहीं उठा लेती ?

कॉकपिट से घोषणा की जाती है देवियों और सज्जनों हम लोग लॉस एंजेलिस पौन घंटे पूर्व आ चुके हैं |अभी रात के साढ़े ग्यारह बजे हैं , अगली तारीख में रात के बारह बजे के बाद ही दरवाजे खोले जायेंगे |क्या एयरलाइन को मालूम नहीं कि हवाई जहाज़ आ रहा है ?यदि किसी शिशु का समय पूर्व जन्म हो जाता है तो क्या कह दिया जाता है अभी अस्पताल में जगह नहीं है ,उसे धरती पर आने से रोके रखें |या उसे लॉबी के पास बाहर ही पटक कर रखें |

कुछ एयरलाइन ओढ़ने को एक कम्बल यात्री को देती हैं और कुछ पैसे लेती हैं |लेकिन उस कम्बल से हाथ की अंगुली ढँक सकती है या पाँव का पंजा |बताओ उसे लेकर क्या करें ?

बिलकुल प्रारंभ में अमेरिकन एयरलाइन्स का नारा था “ समथिंग स्पेशल इन द एयर “यानी हवा में कुछ विशेष |वे नारे हवा में उड़ गए , नई हवा में नए नारे आ गए |यूनाइटेड एयरलाइन्स का नारा था “ फ्रेंडली स्काइज “यानी आकाश भी मित्रवत |यह नारा उस समय यात्रियों को ठीक लगता था जब सारी परिचारिकाएँ महिलाएं ही हुआ करती थीं |जब से सारे पुरुष सहायक रहने लगे हैं , इस नारे की अर्थवत्ता खो गयी है |

उड़ान से पूर्व विचित्र घोषणा की जाती है |कहा जाता है कि सहायकों का काम यात्रा को सुरक्षित करना है |प्रश्न यह है कि आपका काम सुरक्षा देना है या खुशी देना |सुरक्षा देना तो पायलट का काम है ,आपका काम तो यात्री को यह बताना है कि मूवी चल क्यों नहीं रही ?पंद्रह घंटे से लगातार सूरज के साथ साथ चलते चलते उसका माथा भन्ना रहा है , उसे नींद नहीं आ रही है , क्या कोई सिरदर्द दूर करने का उपाय आपके पास है ? थोड़ी सी जगह में सिकुड़कर वह कब तक बैठा रहेगा , थोडा उसे फ़ैल जाने का रास्ता दिखाएँ |यदि खतरे के समय उसे कूदना पड़ा तो उसे कैसी मदद दी जायेगी ?

एयरलाइन्स के सामान के लिए यात्री से अतितिक्त राशि लेना अच्छा नहीं |यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी रेस्त्रां में खाने के लिए अलग प्लेटों के लिया अतिरिक्त चुकाना होता है |यदि आप प्लेट का पैसा अतिरिक्त नहीं दोगे तो भोजन आपकी गोद में रख दिया जायेगा |आप चाहें तो खुले रूमाल में या हाथ में भी ले सकते हैं |एयर लाइन जानती है कि कौन बिना लगेज यात्रा करता है ?हाँ आतंकवादी या बम्बार्ड करने वाले कर सकते हैं |

निजी विमानों में बैठना यात्री को राजा के समान सम्मान देता है परन्तु यदि दुर्घटना हो जाये तो एक छोटा सा समाचार आ जाता है ,”चार लोग विमान में सवार थे ,कोई नहीं बच पाया |इनमें एक अरब के शेख मोहम्मद असलम भी थे |”इसीलिये व्यावसायिक और नियमित उड़ानों में यात्रा करना ही समझदारी है |


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