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वर्ष: 2, अंक 31,  फरवरी(द्वितीय), 2018



गणतंत्र दिवस:
हम मज़बूत गणतंत्र से ही बनेंगें
एक भारत ,श्रेष्ठ भारत

घनश्याम बादल


भारतीय गणतंत्र आज 68साल का हो चुका है । पडो़सी सहोदर देश भी उसी दिन और हमसे एक मिनट पहले पैदा हुआ था 1947 में उसने अपना रास्ता पकड़ा और हमने अपना । आज हम इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि हमाीरा चुना हुआ लोकतंत्र व गणराज्य का रास्ता कहीं अधिक फलीभूत हुआ है । जहां पड़ोसी देश में जलन , ईर्ष्या , आतंक व युद्धोन्माद बढ़ा वहीं इस देश में लोकतंत्र ने न केवल अंग़डाई ली अपितु दुनिया भर को भी उसने राह दिखाई । जहां उस देश के हाथ में सदा भीख का कटोरा रहा , पह दूसरे देशों की कठपुतली बना रहा , उनकी मदद पर निर्भर होता गया वहां के शासक बजाय अपने देश को संवारने के , उसे प्रगति के रास्ते पर ले जाने के भारत के हजार टुकड़े करने सपने देखते रहे जनता का बेवकूफ बनाते रहे , अपनी सारी ताकत परमाणु बम बननो में खपाते रहे , आतंक का एक ऐसा भेड़िया पालते रहे जो उनके अपने ही बच्चो को खाता रहा, उन्हे जख़्म देता रहा। वहीं हमने बावजूद हर बाधा ,मुष्किलों और आपसी राजनैतिक मतभेदों के लोकतंत्र को पाला पोषा हर चुनाव में बिना एक भी बूंद लहू गिराए सत्ता व सरकारें चुनी ही नहीं अपितु वक़्त आने पर बड़ी ही कुषलता के साथ तवे पर पड़ी रोटी की तरह सत्ता व सरकारें अदली बदली भी और उसीका नतीजा है कि आज हमारा गणराज्य किसी फूली रोटी सा न केवल पेट भर रहा है अपितु देष को बहुत अच्छे से पोषित भी कर रहा है । और इसका श्रेय जाता है इस देष की समझदार और सहिष्णु जनता यानि अवाम को, नेता भी इसका श्रेय चाहें तो ले सकते हैं । अस्तु , श्रेय कोई भी ले पर आज गणतंत्र के 68 वें साल में प्रवेष करने पर सारा देश उसकी जनता व कर्मठ अधिकारी कर्मचारी कृषक , उद्योगपति ,श्रमिक सब बधाई पाने के हकदार हैं , सब को बहुत - बहुत बधाई ।

यदि आज पलटकर एक पुनरावलोकन करें तो सहज ही यक़ीन नहीं होता कि हमने , इस देश ने , हिन्दुस्तान ने इतनी तरक्की करली है इतने मील के पत्थर गढ़ लिए है खुद से ही रष्क होने लगता है एक असीम गर्व की अनुभूति होती है । और मन बार बार जय हिन्द , जय हिन्द जय हिन्द का उद्घोष करने करने लगता है , वंदे मातरम कहने को मन करने लगता है मगर कहीं से एक डर भी उभरता है वंदेमातम कहने में । अब यह डर क्या है सब ही जानते हैं अच्छा हो कि इस पर कम से कम आज के दिन चर्चा न ही करें । हां , इतना तो कहना ही पड़ेगा कि बेहतर होता ऐसे हीालात न बनते और और सब कुछ भूल बिसरा कर , अपने मज़हब ओर कट्टरता को एक तरफ रख कर हमस ब समवंत स्वर में इस या उस ज़बान में वतन को सबसे ऊपर रख पाते और अगर ऐसा हो पाता तो आज हम जहां हैं उससे भी कहीं ओर बहुत आगे खड़े होते विश्व पटल पर । चलिए , जो गलतियां हुई सो हुई , अब तो उनसे बचा ही जा सकता है औार उसका सबसे बेहतरीन रास्ता है हम हिन्दू मुसलमान या सिख इसाई न रह कर केवल और केवल हिन्दुस्तानी हो जाएं । हम बेशक दुनिया के अपने आप में सबसे अनोखे , सबसे अद्भुत गणराज्य हैं । ‘लोक’ और ‘तंत्र’ की नई इबारत लिखने में सबसे आगे ‘गण’और ‘तंत्र’ की ताकत को तौलते ,पहले खुद के लिए असंभव पा्रयः चुनौतियां खडी करते है , कभी -कभी डगमगाते , लड़खड़ाते भी हैं आपस में ही सिर फुटौवल भी कर लेते हैं ,दंगे भी बो लेते हैं और एक दूसरे को मार काट भी लेते कभी धर्म तो कभी जाति या क्षेत्र अथवा भाषाई अलगाव के भालों से एक दूसरे का सीना छलनी करने में नहीं चूकते , अपने ही विकास को लंग्ड़ा करने से भी बाज नहीं आते , सत्ता में बैठ भ्रष्टाचार व बेईमानी करने से भी नहीं मानते , राजनैतिक स्वार्थों में डूब कभी कभी देष को दरकिनार कर अपना और अपनो को पेट सबसे आगे कर लेते हैं मगर फिर भी हम एक हैं , दुश्मन के ग्रुर्राने पर सब मिलकर टूट पड़ते हैं , देष की सीमाओं पर लड़ते या मरते वक़्त हम केवल हिन्दुस्तानी बन जाते हैं भला ऐसा अनोखापन और कहीं ? इसी अनोखेपन को बनाए बचाए रखने इस पर मर मिटने उसे सलाम करने का गणतंत्र दिवस से बेहतर दिन भला दूसरा दिन और कौन सा होगा ? तो आइए गणतंत्र की जय बोलें इस भावना के साथ कि हम इसे मिटने नहीं देंगें इसे हर हाल पालते पोषते रहेंगें ।

आज जहां हम खड़े हैं वहां तक आने में इन 68 बरसों में सबने येगदान किया है । नेहरु की दृष्टि व स्वप्नशीलता , लौह पुरुष पटेल का फौलादी संकल्प , इंदिरा की चातुरी व कूटनीति , राजीव की हम इक्कीसवीं सदी की ओर बढ़ रहे हैं के नारे के के साथ सैमपित्रोदा जैसे तकनीकी समृद्ध लोगों को राजनीति में इस्तेमाल करने व आधुनीकीकरण को तवज्जो देने , नरसिम्हाराव के आर्थिक दरवाजे खोलने , मनमोहन सिंह द्वारा उसी नीति को बढ़ावा देने , अटलबिहारी के निडर होकर देश को परमाणु शक्ति बना देने और अब नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत को ‘बनाना स्टेट’ की बजाय पलटकर वार करने , दृढ़ता से शत्रु पर सर्जिकल स्ट्राइक करने , नोटबंदी और जी एस टी जैसे दूरगामी फैसले लेने और कार्यसंस्कृति को बढ़वा देने के साथ ही देशभक्ति के जज़्बे को सातवंे असमान पर ले जाने सबने समेकित रूप से भारत को आज का ताकतवर भारत बनाया है ।

इस प्रगतिपथ पर इसरो , व हमारी सेनाओं ने भी अपने अमिट निशान छोड़े हैं । एक ने सुई भी न बना पाने वाले देश को चंद्रयान , मंगल यान , कितने ही सेटेलाइट आर्यभट्ट , एपल मॉम मिशन और मिसाइल व लाउंचर दिए तो दूसे ने चीन से मिली पराजय के बाद पाक विजय , बांगलादेश का निर्माण , श्रीलंका में शांति सेना के साथ समन्वय करके अपनी धाक जमाई है । तो यें दोनो ही सैल्यूट के अधिकारी बनते हैं । इन गणतंत्र के योद्धाओं को सलाम ।

देश अंदर बाहर दोनों से बनता है । बाहर से सुरक्षा और अंदर से मज़बूती किसी भी देष को सषक्त करती है । देष का पैसा बर्बाद हाने से बचे तो निर्माण बढ़ता है वर्तमान प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान भले ही एकदम से इसे रामराज्य न ला पाए पर देष को एक दिशा तो दे ही सकता है पर ऐसे काम अकेला प्रधानमंत्री नहीं कर सकता , अकेले सरकार भी नहीं कर सकती इसमें पूरे देष का सहयोग चाहिए । एक और अच्छी बात हुई पिछले दो तीन साल में कि प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने आने वाली पीढ़ी को लक्ष्य बनाया उसे साफाई का महत्व बताया , उसे सपने देखने को हुनर दिया और उसके परिणाम देर सबेरे आएंगें ही बल्कि कहें कि आने भी लगें हैं तो गलत न होगा । ऐसे प्रधानमंत्री और उनकी ऐसी सोच भी नमनीय है इस बात पर झगड़ने की बजाय विपक्ष को भी उनकेे साथ होना चाहिए ।

तीन तलाक जैसे मुद्दे में हाथ डालने का मतलब किसी मधुमक्खियों के छत्ते में हाथ डालने से कम नही और षायद पहली बार किसी सरकार ने खुलकर यह ख़तरा उठाया है । बेषक , हर कौम का अपना एक मज़हबी विचार होता है और उसकी सोच का सम्मान भी होना चाहिए पर महिलाएं देष का एक बड़ा संसाधन हैं और इस संसाधन की रक्षा करना उसे महफूज़ महसूस कराना भी बहुत ज़रुरी है । अगर मुस्लिम समाज का षिक्षित तबका साथ दे तो बिना किसी कानून के भी तीन तलाक मिट सकता है पर ऐसा हुआ नहीं न ही इसकी उम्मीद है तों फिर संवैधानिक सुरक्षा भी ज़रुरी है और खु1षी की बात है कि इस मुद्दे पर मुसलमान महिलाएं मुखर हुई हैं यानि भारतीय गणतंत्र का सेाया हुआ जाग रहा है और वह जाग जाए तो समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राज्य की परिकल्पना सच होकर ज़मीन पर आ जा्रगी तो आइए उम्मीद करें कि अगले गणतंत्र दिवस से पहले ही तीन तलाक जैसे मुद्दे भी सुलझ जाएंगें ।

प्रधानमंत्री मन की बात से भले ही असहमतियां हों , सरकार पर छुपा केसरिया एजेंडा लागू करने की तमाम कोषिषों को आरोप भी हों , डिजिटल पेमंट , पे टी एम की आदर्श परिस्थितियां भले ही न हो पर फिर भी हम एक बढ़ते व मज़बूत होते भारत को तो देख ही रहें है इस गणतंत्र दिवस पर यह सब बताने लक्ष्य, यह बताना है कि अब हम एक परिपक्व गणतंत्र हो गए हैं । पर , प्रगति की नित नई कहानियों , विकास के नए से नए सोपानों के बीच गरीबी , अशिक्षा , लगातार बढ़ता भ्रष्टाचार , रिश्वत खोरी , कमीशनबाजी , अनैतिक होती राजनीति व मगरमच्छ से राजनेता, गांव के बुरे हाल ,षहरों की गंदगी , बढ़ते प्रदूषण की लाईलाज सी होती बिमारी , षिक्षा का अजीबो गरीब परिदृष्य , उद्योगों में मज़दूरों की खस्ता हालत , किसानों की शाष्वत सी हो चली गरीबी क्या भारत की सफल गणराज्य परंपरा के खिलखिलाते चेहरे पर तमाचा नहीं है ? इस तमाचे का इलाज हमें ढूंढना होगा ।

बंटा कटा समाज , जातिवादी विभाजन , अषिक्षा, क्षेत्रवाद, भाषावाद, आतंकी हमलांे के ख़तरे , आत्म निर्भरता की दूर सरकती मंजिलें , दरकते सामाजिक , राजनैतिक , आर्थिक मूल्य व आदर्ष कितने ही किले फतह करने हांेगे हमें अभी तो विश्वशक्ति बनने के लिए ।

खैर, मंजिलें भी मिलीं और हम गिरे भी हैं इस ऊंचाई तक पंहुचने के सफ़र में । आज भी चुनौतियां हैं । अंदर से भी बाहर भी आंगे भी रहेंगी कभी चान लजाला होगा तो कभी पाक षडयंत्र करेगा ,कभी उत्तर कोरिया को घेरने में हमें मोहरा बनाने की काषिषें होंगीं तो कभी आतंक अपने दांत दिखा कर गुर्राएगा । अंदर से भी हिन्दू मुसलमान के कार्ड नहीं खेले जाएंगें कोई आष्वस्त नहीं कर सकता । पर, फिर भी हमें तो चलते रहना है , बढ़ते रहना है और दुनिया को दिखा देना है कि हम सच में ही हैं एक भारत , श्रेष्ठ भारत और जितनी जल्द हम यह कर पाएंगें उतनी जल्दी भारत विश्व शक्ति बन कर सगर्व तना खडा होगा ।


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