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वर्ष: 2, अंक 31,  फरवरी(द्वितीय), 2018



ज्योतिष जी


राजीव कुमार


पत्नी, बेटे, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की बात को अनसुनी करके, उनको नाराज करके, मुकुंद महतो ने अपने ज्योतिष मित्र भूगर्भ पांडे की बात पर भरोसा किया।

बेटे की सगाई के एक दिन पहले मुकुंद महतो की पत्नी ने कहा, “फिर सोच लीजिए, टेंट और जेनरेटर बुक कर ही लीजिए।”

मुकुंद महतो अपनी पत्नी पर क्रोधित होकर बोले, “ज्योतिष ने कह दिया कि न तो पानी पड़ेगा और न ही बिजली कटेगी। तो रुपया काट रहा है क्या?”

मुकुंद महतो की पत्नी गुस्से में आँख तरेरकर चली गई और सुनकर बेटे ने अपने सिर पर हाथ रख लिया।

सगाई वाले दिन ज्योतिष भूगर्भ पांडे, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ, खुले आकाश के नीचे, ठंडी, मंद-मंद हवा और चाय-नाश्ता का आनंद ले रहे थे। मौसम ने करवट बदली और जोरदार बारिश होने के कारण बिजली गुल हो गई। पड़ोसी अपने घरों में आ गए। सारी तैयारी बर्बाद हो गई।

मुकुंद महतो की पत्नी हाथ में इमरजेंसी लाइट लिए, दुबके-ठुंसे रिश्तेदारों के बीच में ढूँढ़ने लगी और न मिलने पर पति से आगबबूला होकर बोली, “खबरदार, अगर उस ज्योतिष को शादी में बुलाया तो, हमसे बुरा कोई नहीं होगा। सर्वनाश हो उसका।” बरसात के साथ-साथ गालियों की भी बरसात होने लगी। मुकुंद महतो भारी पश्चात्ताप में डूब गए। ज्योतिष भूगर्भ पांडे ने छुपे रहने में ही अपनी भलाई समझी।


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