Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



इक्यानवे पर


कवि: स्वर्गीय निरंजन भगत
अनुवाद: डॉ॰रजनीकान्त एस.शाह


                                
अभी एकाध हफ्ते पूर्व जिनका निधन हो गया है ,ऐसे गुजराती के 
राजेन्द्रयुग के कवि श्रीमान निरंजन भगतजी का 92वें वर्ष की अवस्था 
में देहावसान हो गया है।आप गुजराती कविता के तीन युगों के साक्षी 
रहे हैं।उनके अनोखे प्रदान को लेकर साहित्य अकादमी ने उन्हें सम्मानित 
भी किया है।ऐसे युगवारती कवि को श्रद्धांजलि के रूप में उनकी कविता 
का हिन्दी अनुवाद मैं सादर प्रेषित कर रहा हूँ।



            
जब यह शाम धीरे धीरे फैलती चले,

तब यह किसकी छाया धीरे धीरे रमती चले?

तब प्रभाती ओस के रूप

और दोपहरिया धूप,

उन सबकी स्मृतियाँ मेरे मन में रमने लगे।

जब शाम भार सारे सहने लगे

और दूर क्षितिज पर शांत होने लगे

तब किसीकी छायामूर्ति मुझे भाने लगे।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com