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वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



सपने खरीदकर


रवि रश्मि 'अनुभूति '


   
 
सपने खरीदकर तुम , देना गरीब को .....
वैसे नहीं दग़ा तुम , देना गरीब को .....
  
आशा जगा रखो पर , पूरी करो सदा .....
धोखा न तुम कभी अब , देना गरीब को .....
  
तूफ़ान जब कभी उसके , द्वार हो खड़ा . ...
आश्रय तभी सुनो तुम , देना गरीब को .....
  
कुटिया नसीब उसे , उज्ज्वल न रात हो .....
दीपक जला , मदद कर देना गरीब को .....
  
सोचो कभी न तुम उसको , जानते नहीं .....
पहचान ही ज़रा तुम , देना गरीब को .....
  
ओढ़े व पहन ले अब , कुछ वस्त्र वह कभी ......
धारण करे वस्त्र वह , देना गरीब को .....
  
माना कि मान - आदर , उसका हुआ ' रश्मि ' .....
सम्मान बढ़ा - चढ़ा कर , देना गरीब को ....
 

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