Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



बंदर मामा


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


     

बंदर मामा उछल -कूदकर ,
बगिया में आ जाते हैं ।
फल बगिया के तोड़-ताड़कर ,
उधम खूब मचाते हैं ।।1।।

जितना भी हो अटपट रस्ता ,
तनिक नहीं घबराते हैं ।
आगे बढ़कर जीवन गढ़ना ,
सबक यही सिखलाते हैं ।।2।।

 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com