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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



कवि सम्मेलन के लिये पापड़ बिलाई


सुदर्शन कुमार सोनी


पिछले साल भी हमने कवि सम्मेलन का आयोजन किया था । हम कवि नही है लेकिन कवियो के आयोजक है । वैसे ही जैसे कि आजकल बडे़ बडे़ अस्पतालो के जो मालिक या पा्रयोजक होते है वे डाक्टर स्वयं तो नही होते हैं लेकिन डाक्टरो के पा्रयोजन का काम करते हैं और डाक्टरो से ज्यादा इनकी इज्जत होती है ! अब आप समझ गये होंगे कि बंदा इज्जतदार आदमी है ! पिछले साल भी हम मुश्किल से कवि सम्मेलन के लिये आयोजक जुटा पाये थे । कवियो को जुटाने मे इतनी समस्या नही गयी थी , वे तो एक पैर से तैयार खडे़ थे कि कोई बुलाये और वे रवानगी डाल दें। पिछले साल कवि सम्मेलन तो हमे दिहाडी़ मजदूरो के दम पर ना पडा़ था क्योंकि स्र्माट सिटी के श्रोता समझदार स स्मार्ट हो गये थे । हर बार उन्हे बेवकूफ नही बनाया जा सकता था । हमने रवि मे पंहुचने वाले बुला तो लिये थे लेकिन वे इंतजार करते रहे मंच के पीछे श्रोताओ का , जब श्रोता आने मे सोता ही रह गये तो फिर हमने एक समझदारी की एक ठेकेदार को आनन फानन मे इसका आयोजक बना दिया और उसकी दम पर हमने उसके पो्रजेक्ट के सोते मजदूरो को जगाकर श्रोता बना कर बैठा दिया । उन्होने विरोध किया तो हमने कहा थोडी़ ही देर की बात है कार्यक्रम शुरू होगा तो आप अपने आप फिर से सोता हो जाओगे।

लेकिन इस बार हमने ठान लिया है कि हम असली श्रोताओ के साथ ही कवि सम्मेलन करेंगे आखिर बाजार मे अपनी भी कुछ साख है , आयोजनो के मामले मे । वैसे आयोजनो से काफी लाभ है यह लाभ का ही धंधा है भले ही खेती अभी तक लाभ का धंधा न बन पायी हो ? जिससे कोई काम अपना अटका होता है अपुन उसी को मुख्य अतिथि की कुर्सी पर बैठा देते हैं।

इस बार हमारा श्रोता तलाश अभियान जेल से शुरू किया वैसे भी जेल हमे आज के माहोल मे अनुकूल लगा । कोई भी यहां पर कभी भी बाहर जा सकता है , बर्तन से हथियार बना सकता है , काजू किशमिश खा सकता है और किसी को कानो कान खबर नही हेाती ! सीसीटीवी सीसी करते रह जाते है लेकिन उसे कोई सुधारने की बात नही करता , तो हम जेल अधीक्षक जी की गुड बुक मे आकर उनके कार्यालय यानि की जेल मे बिना कोई अपराध किये पंहुच गये । हमने अपना प्रस्ताव रखा वे सहर्श मान गये आपको बताता हूं कि उन्होने एक ही छोटी सी शर्त रखी कि उनकी भी चंद कविताये पढी़ जायेगी । यह सुन एक ओर तो हम भाव विहल हो गये उनका साहित्य के प्रति अनुराग देखकर लेकिन दूसरी ओर हमे यह खटका लगा कि यह नया नया शौक है इनका कंही श्रोता न सोता हो जायें । वे हमारी बात समझ कर बोले कोई बात नही सोता की तो हम लोगो को अच्छी पे्रक्टिस है यहां तो केवल कैदी नही सोते हैं बाकी हर आदमी सोता है और सोता ही रह जाता है।

उन्होने अपने एक प्रहरी को कैदियो के सामने यह प्रस्ताव रखने भेजा जब वह लौट कर आया तो उसका भेजा कैदियो से चटा चटाया लग रहा था । आते ही बोला बडी़ मुश्किल है कैदी कह रहे है कि सजा एक साल और बढा़ दो लेकिन कवि सम्मेलन मे नही जायेंगे ! लेकिन प्रहरी समझदार था बोला सर आपकी भी कविता की बात थी , बहुत समझाया तो निम्न शर्तो के आधार पर वे भागीदारी के लिये तैयार हो गये हैं। एक कि वहां जबरिया पूरे समय बैठने की कोई बेडी़ नही होगी , दो जब श्रोता से सोता बनना होगा बनने की सुविधा होगी , तीसरा इसमे शिरकत करने के बाद तीन माह सजा कम कर दी जायेगी , चैथा अगले सात दिन जेल मे कोई श्रम का काम नही करेंगे , पांचवा अगले दिन विशेष भोज दिया जायेगा । यह सुन जेलर ने माथा पकड़ लिया मैने सोचा कि इनकी कविता सुनकर भी श्रोता एैसे ही माथा पकडेंगे । अब हमने यहां से रवानगी डालने मे ही भलाई समझी ।

जेल से हम सीधे एक स्कूल पंहुच गये यहां के पा्रचार्य महोदय हमारे दोस्त थे कारण यह था कि वे स्कूल के समय मे कविताये लिखते रहते थे और पूरे स्टाफ को उनसे एलर्जी थी कारण वही कवि की छूत की बीमारी कि कोई भी दिखा और उसको चंद पंक्तिया सुनाने लगते थे । हमने अपना प्रस्ताव उनके सामने रखा तो वे बल्लियों उछल गये ! हमे माजरा समझ मे नही आया , हमारे बोलने के पहले ही वे बोल उठे कि बिल्कुल हम छात्रो को श्रोेता के रूप मे भेजने तैयार है बस इतना फेवर आपका हो जाये ? ये तो हम उनके बोलने के नम्र तेवर से ही समझ गये थे , कि इनकी भी चंद कविताये झेलना होगी । हमारी अटकी थी तो हमने हां करनी ही थी ।

लेकिन खेल बिगड़ने मे देर ही कितनी लगती है पता नही कंहा से कवि सम्मेलन मे छात्रो को श्रोता के रूप मे भेजने की बात छात्र संघ के अध्यक्ष को पता लग गयी। एक नेता नुमा छात्र बिना बुलाये ही आ गया और बिना भूमिका के ही उसने अपनी बात रख दी कि छात्रो को स्कूल प्रबंधन द्वारा चाहे जब अपने स्वार्थ के लिये बलि का बकरा नही बनाया जा सकता। लेकिन जब हमने व पा्रचार्य ने अनुनय विनय की तो वह कुछ शर्तो के आधार पर तैयार हो गया । उसकी शर्ते थी कि उस दिन स्कूल की पूरी छुटटी रहेगी लाने ले जाने की व्यवस्था आयोजक या स्कूल करेगा । अगले दिन भी स्कूल की छुटटी रहेगी , उसके अगले दिन मनोवैज्ञानिक से छा़त्रो की कांउसिलिंग करवायी जायेगी ताकि जो छात्र कविताये झेलकर अवसाद मे चले गये हों उनका इलाज तुरंत हो जाये।

यहां भी बात नही बनी । पा्रचार्य बहुत पछताया आखिर वह चंद पंक्तियो के पढ़ने से वंचित हो गया था ता ेपटठे ने इसकी वसूली हमारे चाय के दौरान कर ली ! हम चाय पीते रहे और उसने दो तीन कविताये वांच दी कमबख्त ने चाय इतनी खौलती बुलवायी थी कि हमे चाय पीते पीते तीन कविताये झेलना पडी़ ! अब आप समझ रहे होंगे कि हम तो आयोजक है फिर कविताओ से इतनी एलर्जी कैसे , आयोजक हम भले होंगे लेकिन एक बार जंहा कवि सम्मेलन शुरू होता है तो हम कान मे रूई ठूंस लेते है या आयोजन स्थल से दूर जा खडे़ होते है किसी भी बहाने और मध्यांतर या आखिर के थोडे़ पहले ही आते है झूठी तारीफ के पुल बांधने।

अब यहां भी दाल गलती न देखकर वैसे दाल तो आजकल कंही नही गलती । उसी के यहां गलती है जिसके पास कालाधान काफी तादाद मे हो बाकी तो साप्ताहिक दर्शन कर पा रहे हैं ! स्कूल से हम एक वृद्वाश्रम मे आ गये यह एक संस्था द्वारा संचालित था हमने अपना प्रस्ताव दिया । वहां का प्रंबधक अभिभूत हो गया हमारी लच्छेदार बातों मे कि हम समाज के वंचित वर्ग यानि कि बुजुर्गो के लिये भी स्वयं बुजुर्ग न होते हुये भी कितना करना चाहते हैं उसने सहर्श स्वीकृति दे दी । वैसे मेरे मन मे खटका था कि कंही यह भी अपनी कविता की बात न ले आयें । एक बुजुर्ग व्यक्ति यहां भी बैठा था जब हम बात कर रहे थे तो यह बीच मे ही पैर से लंगडा़ने के बावजूद दौड़ कर अंदर को चला गया था । हमने ध्यान नही दिया था यह समझा कि यह कोई कर्मचारी होगा । लेकिन यह तो बीस बुजुर्गो का मोर्चा लेकर आ गया था। हाथ मे एक विरोध के स्वरो को प्रदर्शित करती तख्ती भी ये ले आये थे बाद मे पता चला कि पिछले कवि सम्मेलन के बाद इन्होने स्थायी रूप से विरोध की तख्तिया बना लीं थी । मोर्चे का नेता बोला कि हमारे दो तीन बुजुर्गो की हालत पिछले कवि सम्मेलन मे खराब हो गयी थी फिर वे माह भर बीमार रहे थे । एक दो तो बाद मे बोल रहे थे कि यदि यही करना है तो घर को वापिस छोड़ दे वहां भी तो बेटे बहु की ताने रूपी कविताओ से ही तो उक्ता कर वे वृद्वाश्रम को आये थे । अब और श्रम हम कवि सम्मेलन को सुनने का नही कर सकते। वह बोला कि एक उपाय है कि कवि सम्मेलन की क्षतिपूर्ति के रूप मे बाद मे वृद्वाश्रम वाले कैटरीना , करीना व कंगना का डांस कार्यक्रम आयोजित करेंगे ।

यहाँ से भी हमे रूखसत होना पडा़ वैसे वृद्वाश्रम वाले ने अपने बुजुर्गो से निवेदन किया कि थोडे़ नीचे आ जाओ लोक कलाकारो का कार्यक्रम करवा देंगे । लेकिन वो बुजुर्ग तैयार ही हुआ कैटरीना व कंगना पर ही अडा़ रहा । और अब हम यहां से अपनी कालोनी मे आ गये। वहां सोसायटी अध्यक्ष से निवेदन किया । वह हमे दखते ही नाक भौं सिकोड़ने लगा। हमने आते ही कहा कि रस्तोगी जी हमारी संस्था ने तय किया है कि अबकि आप हमारे कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे यह सुनकर वह बात करने ताे कम से कम तैयार हो गया । लेकिन काफी सजग रहा हमसे बात करने के समय ।

हमने जब अपना प्रस्ताव रखा तो उन्होने सोसायटी के दो तीन लोगो से फोन का स्पीकर आन कर मेरे सामने ही बात की दो ने तो कवि सम्मेलन का नाम सुनकर ही फोन रख दिया कि बाद मे बात करते हैं , अभी मेहमान हैं घर मे एक बोला कि पिछले बार ले गये थे बहुत झेलना पड़ता है इस बार नही झेल पायेंगे । कुल मिलाकर यहां भी बात नही बन पायी वैसे हमारे जाते समय रस्तोगी थोडे़ मायूस हो गये थे । आखिर सोसायटी के बाकी कारिंदो की भले ही बलि चढ़ती लेकिन वे ात ेमुख्य अतिथि बन जाते । और कोई भी नेता ता ेएैसे ही बनता है दूसरो के अरमानाे का गला घांेटकर गलकाट प्रतियोगिता मे आगे को आ पाता है ।

हमे माह भर हो गया है श्रोताओ की तलाश जारी है वे गुमशदा की भांति मिल ही नही पा रहे हैं भेल हम अभी कामयाब नही हुये है लेकिन ’मन मे है विश्वास की एक दिन होंगे कामयाब’। सोच रहे थे कि देश मे माहोल अनुकूल है तो वीर रस पर कविता करवा लेते है लेकिन एक हमारा परिचित वीर रस का कवि लेकिन हार्ट पेशेंट एक शहर के कवि सम्मेलन मे पिछले ही सप्ताह एैसा चीखा कि समारोह स्थल पर ही वीर गति को पा्रप्त हो गया। यह चैप्टर भी खुलने के पहले ही समाप्त हो गया ।

आपके पास कोई फार्मूला हो जिससे कि कवि सम्मेलन के लिये श्रोता जुट सकतें हो तो उसका स्वागत है , आखिर हमारी साख दांव पर लगी है एक गंगू नाम के व्यक्ति का एक सुझाव जरूर मिल गया है । उसने लिखा है कि मजदूरो की दुगनी मजदूरी और सबको एक बाटली अंगे्रजी वाली का यदि वादा करो तो वो श्रोताओ की जो सोता नही होंगे फौज कूच करवा देंगे समारहो स्थल की ओर बस दस दिन पहल ेबता दिया जाये । क्योंकि उसके ये मजूदर हमेशा एडवांस बुकिंग मे रहते हैं ।ये मजूदरी अलग तरह की करते हैं कवि सम्मेलन के श्रोता के रूप मे ।

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