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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



कलयुग

सुशांत सुप्रिय


एक बार एक काँटे के शरीर में चुभ गया एक नुकीला आदमी काँटा दर्द से कराह उठा बड़ी मुश्किल से उसने आदमी को अपने शरीर से बाहर निकाल फेंका तब जा कर काँटे ने राहत की साँस ली
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