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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



प्यार करो तो पाओ प्यार

सुधेश


प्यार करो तो पाओ प्यार कोई न देता आज उधार । आँख बताती मन में चोर प्यार न बिकता हाट बजार । वह चलता है शीश उठाय मैं न चलूँ क्यों सीना उभार । चाह तुम्हारी पाओ संसार सीख लो तुम भी देना यार । ख़ाक शऊर पर चाहो शराब यों ही न आँखों चढ़े ख़ुमार ।
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