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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



बारिश आई

सुधेश


प्रेम घटा उमड़ी आँसू की बारिश आई बहुत दिनों के बाद ऐसी बारिश आई । ऐसी नई घटना रोज कहाँ होती है घुटन धूप के बाद ऐसी बारिश आई । तिमिर घटा उमड़ी बरसी क्या बारिश कह दूँ प्रेम भरी आँखें बरसें तो बारिश आई । चार पड़ीं बूँदें जल जल और उठी धरती झूम घडी भर बरसे तो बारिश आई । बाद युगों के कोई प्रेमी से मिलता प्रेम साज पर गाती सी बारिश आई ।
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