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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



काँचघर में कैद मछलियाँ

शोभा श्रीवास्तव


काँच के खूबसूरत घरों में कैद मछलियाँ ढूँढती हैं पानी का विस्तार नापती हैं गहराई सिमटी हुई दुनिया में तलाशती हैं अपने होने का अर्थ जैसे लड़कियाँ चाहती हैं पंख हवा आसमान।
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