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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



मन में अरमान

सीमा सक्सेना


अहसास मन में जगा रहता है कोई दिल में बसा रहता है महकती खुशबु सराबोर करती है इश्कका मेरे अंदाज़ जुदा रहता है विश्वास कायम खुद से ज्यादा तुम पर, दिल में करार रहता है हार कर पाया है मैंने तुमको सजदे में सर मेरा झुका रहता है न रोक पायेगा तूफां भी क़दमों को मन में अरमान बना रहता है दूर नहीं कोई मंजिल है अब मुझसे यकीं मेरी ज़िद को बना रहता है गुम हो ही गयी हूँ अब तो कोई ढूंढता हर वक्त रहता है प्रेम की इबारत लिख डाली हैं मैंने, होश मुझको कहाँ रहता है !!
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