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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



आओ खुशियाँ मनाये

प्रिया देवांगन "प्रियू"


आओ हम सब मिलकर खुशियाँ मनाये , अपने घर को महफिल से सजाये । आपस में बैठकर दो चार बातें करे, और इस घर को खुशियों से भर दे। जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं है , कब कौन कहां जायगा पता नहीं है । इस पल को हम अच्छे से जी लें, और अपनी जिंदगी खुशियों से भर ले। वक्त बहुत कम है हमारे पास , जिंदगी तो यूँ ही गुजर जायेगी । सारे खुशियों को अपने झोली में भर लो, गम को भुलाने में वापस गम नही आयेगी । खुशियों को देखकर गम छू भी नहीं पायेगी, इस संसार में ऐसी खुशियाँ भर दो, की चाहकर भी गम तुम्हारे पास नहीं आयेगी ।
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