Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



मंथन

प्रताप सिंह


बिलोड़ लेने दो समय को हमारा जीवन-घट; अलग हो जाने दो एक एक अवयव। भँवर की तरंगों पर झूलता हुआ जो श्रृंग तक पहुँचेगा, मंथन रुकने पर वही हमारे द्रव्य की पहचान बनेगा।
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें