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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



बहुत हो गया

महेंद्र देवांगन 'माटी'


बहुत हो गया शांति वार्ता, अब तो मुंह की खाओगे । आंख उठाकर अब देखा तो, मौत के मुंह में जाओगे । पार हो गई हैं सारी हदें, क्षमा नहीं अब पाओगे । एक के बदला 10-10 अब, गिनकर मारे जाओगे । जान चुकी है सारी दुनिया, तेरे इस अंगड़ाई को। आतंकवाद का नाम लेकर, तेरे छदम लड़ाई को। जाग चुका है हिन्दुस्तान, बच नहीं अब पाओगे। दम लगा लो जितना चाहे, कहां भाग के जाओगे । तेरे इस नापाक इरादे, काम नही अब आयेगा । पाकिस्तान के सीने मे, तिरंगा अब लहरायेगा।
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