Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



एक ही घर में

अमरेन्द्र सुमन


एक ही घर में................ हो सकते हैं बहुत सारे लोग भिन्न-भिन्न किरदारों के पोषक हथेली की उॅगलियों की मानिंद जमीन की हकीकत से मालूमात और कल्पनाओं की उॅची उड़ान के वाहक अॅट जाते हैं एक छोटे घर में एक ही घर से बॅटे छोटे-छोटे कई परिवार सावधि सोंच वाले स्वतंत्र मन अनुभवी और अनुभवहीन परपोषी व परजीवी समस्याएॅ कितना कठिन है छद्म वृत्तियों से युक्त-अनुपयुक्त लोगों को पढ़ पाना एक ही घर में जैसे आकाष में उड़ रहे पंक्षियों के अगले पड़ाव की संभावित प्रत्याषा में बहेलियों का मुस्काना
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें