Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



औरतें होती हैं सही वक्त का चुनाव

अमरेन्द्र सुमन


कई-कई फरमान जारी कर डालती हैं औरतें हिदायतों के अपने मर्द दोस्तों के खातिर घर से बाहर कदम रखने के पूर्व प्रतिबन्धित उग्रवादी संगठनों के विरुद्ध तैयार हो रही रणनीतियों की भाॅति उनके मनोविज्ञान से पूरी तरह वाकिफ क्षण भर में वे पढ़ लेती हैं परस्त्री पर पड़ी निगाहों के असंसदीय भाव मर्दों की दिनचर्या में सिर्फ शारीरिक आराम की चीजें नहीं होती औरतें वे होती हैं सही वक्त का चुनाव एक अच्छे परिवार की आचार संहिता बहुत दिनों तक ताजा बने रहने वाले संस्मरण शामिल रहती हैं वे रात्रि नौ के पूर्व ही मर्दों के वापस लौट आने की विवषता में उॅगलियों में गिनती के दोस्तों की विष्वसनीयता में हरवक्त एक उपयुक्त अनिवार्यता में
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें