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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



हाइकू

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'


गाती जुबानी रोज़ चिड़िया रानी भौर सुहानी ******* कमल खिलें जो पोखर-पोखर भाये सबको ******* खिलें नीरज किरणें बिखराई उगा सूरज ******* तम भगाया जगति हरसाई सूरज आया ******* मंदिर घंटी बज रही सलौनी जगता बंटी ******* फूल खिलें हैं अब , सोच-विचार आई बहार ******* झरते पात बदले तरु चोला वाह, रे मौला ! ******* रात अँधेरी टिम-टिमाते तारें यादों की फेरी ******* भाये सबको गुनगुनी सी धूप सर्दी में सूप ******* कैद से छूटे कंबल व रज़ाई सरदी आई
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