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वर्ष: 1, अंक 6, दिसम्बर, 2016



ग़ज़ल - न इसकी माँ न उसकी माँ

अनंत आलोक


न इसकी माँ न उसकी माँ न बाली माँ न बूढ़ी माँ | भई माँ माँ ही होती है न तेरी माँ न मेरी माँ || ** रबड़ की डोल बहना को बड़ी फ़ुटबाल भाई को | मेरी खातिर तो मेले से खिलौना कार लाई माँ || ** तुम्हारा हाल कैसा है बहन ये फोन कर पूछे | मुझे चिंता हुई ये रात क्यों सपने में आई माँ || ** ये आँखे भीग जाती हैं मुझे जब याद आता है | मेरी हिचकी को ले कर जब न सारी रात सोई माँ || ** कभी तुम तंग करते हो घड़ी पल रूठ जाती है | हुआ करती है बच्चों से कहाँ नाराज भोली माँ || ** जिसे मिलती है केवल माँ यहाँ वो भाग वाला है | किसी को दाई मिलती है किसी को मोम आई माँ || ** पिलाती दूध बोतल से फिगर का फेर है सारा | परेशां हो गया आलोक माँ है या है दाई माँ ||
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