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Sahityasudha
वर्ष: 5, अंक 98,दिसम्बर(प्रथम), 2020

अक्षय तूणीर

मुरलीधर वैष्णव

‘‘गवाह राजी हुआ ?’’

‘‘कहां वकील साब ! रूपये दो हजार थाम दिये पर वो तो स्साला सत्तवादी हरिचंद की औलाद बनता है !’’ मौजदीन बीड़ी का लम्बा कश लगाते हुए बोला।

‘‘देख मियां, उसे पांच बार तो बिना बयान के टाल चुके हैं। अब हाकम भी सख्त आया है। इस बार बिना बयान पेशी बदलवाना नामुमकिन है।’’ वकील ने उसे चेताया।

‘‘वकील साब, एक आखिरी पेशी और ले लो। अगली बार उसे जरूर ‘सेटष्कर दूंगा’’, मौजदीन के होठों पर कुटिल मुस्कान तैर गयी। उसे आज ही पता लगा था कि गवाह का लड़का किस रास्ते से स्कूल जाता है। उसने आखिर ब्रह्मास्त्र चलाने की ठान ही ली।

उधर पेशी बदलवाने के लिए माहिर उसके वकील के अक्षय.तूणीर में भी नाना प्रकार के दिव्यास्त्र थे।

ठीक ग्यारह बजे सरकार बनाम मौजदीन के मुकदमे में आवाज पड़ गयी। लेकिन वकील नदारद। बैठे तो वे कैंटीन में थे, लेकिन मौजदीन से कहलवा दिया कि वे सेशनकोर्ट में बिज़ी हैं। आखिर वकील का इंतजार करते.करते दोपहर का एक बज गया। मजिस्ट्रेट ने अब धैर्य खोते हुए अभियुक्त को चेतावनी दी कि यदि दस मिनट में वकील नहीं आये तो वे बिना वकील के ही बयान लेना शुरू कर देंगे। ठीक एक बज कर दस मिनट पर वकील मुंह लटकाए हुए आये और अपना सिर पकड़े हुए मजिस्ट्रेट से विनती करने लगे कि उनके सिर में तेज दर्द हो रहा है। वे गवाह से आज जिरह नहीं कर पायेंगे।

मजिस्ट्रेट ने उन्हें समझाया कि गवाह छठी बार अदालत में आया है। उसकी भी परेशानी को वे महसूस करें। आखिर कुछ वाद.विवाद के बाद यह तय रहा कि वकील सिरदर्द की टिकिया लेकर लंच के बाद में गवाह के बयान करवा देंगे।

सरे-बाजार चाकू दिखाकर सोने की चैन, अंगूठी व नकदी लूटने का मामला था। बयान के लिए लूट का बरामदशुदा माल और चाकू गवाह द्वारा शिनाख्त करने के लिए अदालत के मालखाने से निकाला जाना जरूरी था। लंच के समय में वकील, अभियुक्त मौजदीन और मालखाना बाबू कैंटीन में मलाई युक्त मैंगोशेक की चुस्कियां ले रहे थे। मौजदीन ने अपनी जेब में हाथ डाला और फिर वह हाथ मालखाना बाबू से मिलाया। किसी के कुशल निर्देशन में दोनों के बीच शायद किसी अदृश्य समझौते पर रजत.मुद्रा लग चुकी थी।

लंच बाद वकील अभियुक्त सहित अदालत में सही समय पर आ गये। वकील ने कहा कि वे जिरह के लिए तैयार हैं। उनका सिरदर्द अब ठीक है।

लेकिन कुछ ही क्षणों के बाद पेशकार ने मजिस्ट्रेट को सूचित किया कि मालखाना बाबू की तबीयत अचानक खराब हो जाने से वह आधे दिन के अवकाश पर चला गया है। जाहिरा तौर पर इस बार मुकदमे का माल नहीं निकल पाने से गवाह को छठी बार भी बिना बयान के ही लौटना पड़ा ।


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