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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 67, अगस्त(द्वितीय), 2019

खाली कमरा

राजीव कुमार

बड़ी सी कोठी, मुख्य सड़क के किनारे हर आने जाने वालों के आकर्शण का केन्द्र है। हर आदमी जो भी इस कोठी के पास से गुजर जाता है, वो एक बार रूककर जरूर देख लेता है। कारीगरी और नक्कासी का ऐसा कमाल षायद ही कहीं देखने को मिले। बड़ी सी कोठी का नाम दिया गया है ’ कमला निवास ’ जो कि षहर की सबसे दानी महिला कमला देवी के नाम पर है। कमला निवास में परिवार के सदस्यों की संख्या सोलह हे। उन सबमें आपसी खींचातानी होती रहती है। प्यार भी बहुत है। कमला देवी को बहुत ज्यादा पसन्द करनेवाले और नापसन्द करनेवाले में अनबन बनी रहती है। कमला देवी की मंझली बहु कहती है ’’ माँ, बहुत गलत कर रही हो, धन-दौलत लुटा रही हो, मुर्खता है। ’’

बड़ी बहु कहती है ’’ माँ जो कर रही है, बिल्कुल सही कर रही है। ’’ पुरे छह महीने तक कमला देवी की मंझली और बड़ी बहु में कोई बात-चीत नहीं हुई तो कमला देवी ने समझाते हुए कहा ’’ मंझली बहु भी ठीक कहती है और बड़ी बहु भी ठीक कहती है, तुमलोग मेरे कारण झगड़ा मत किया करो। ’’ कमला देवी सबको बहुत प्यार से खुष होकर समझाती थी मगर वो खुद खुष नहीं रहती थी। कोई दुख उनको अन्दर ही अन्दर खाए जा रही थी। कमला देवी तीनों बहुओं को अपने कमरे में ज्यादा देर टीकने नहीं देती थी। बड़ी बहु साफ-सफायी के उद्देष्य से कुछ समय ठहरती थी। मंझली और बड़ी बहु तीजोरी के रहस्य को जानने में लगी रहती थी। कमला देवी अपने दुख को छिपाते-छिपाते एक दिन सारे दुखों से आजाद हो गई और चली गई अपने पति परमेष्वर के पास। उनकी मृत्यु पांच साल पहले हुई थी। बड़ी बहु अपनी सास की तस्वीर को देखकर भावुक हो रही है, मगर छोटी और मंझली बहु तीजोरी की चाभी तलाषने में लगी है। खाली हुआ कमरा तो किसी सदस्य के द्वारा भर जाएगा लेकिन जिसने कमरा खाली कर दिया, उसकी यादें हमेषा उसी कमरे में रहेगी।


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