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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



सीने का दर्द


राजेश कुमार श्रीवास्तव


पेट और सीने में दर्द की शिकायत लेकर शहर के मशहूर प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचे रोगी के परिजनों को निचे ग्राउंड फ्लोर पर वेटिंग रूम में इंतज़ार करने को कहकर रोगी को प्राथमिक जाँच के लिए पांचवे मंजिल पर ले जाया गया ।

हॉस्पिटल के पांचवें मंजिल पर रोगी की प्राथमिक जाँच कर ली गई है । ईसीजी, ब्लड प्रेशर, बॉडी टेम्प्रेचर मापने के साथ-साथ स्टेथोस्कोप की सहायता से सीने के अंदर की भी प्राथमिक जाँच कर ली गई है । इन सब प्राथमिक जांचों के बाद उसे एक कैप्सूल और एक तरल दवा पीने को देकर आराम करने को कहा गया है । कुछ ही मिनटों में रोगी को आराम महसूस होने लगता है । वह बेड पर उठकर बैठना चाहता है । तुरंत एक नर्स उसे ऐसा करने को मना करती है । वह रोगी को लेटे रहने का सलाह देती है ।

रोगी:- सिस्टर, मेरा दर्द अब आराम हो चुका है ।

नर्स:- फिर भी आप तब तक लेटे रहे जबतक डाक्टर बाबू आकर आपको एक बार फिर नहीं देख लेते ।

रोगी : मेरे घर के लोगों को ज़रा बुला दीजिये ।

नर्स:- उन्हें इस वार्ड में अभी आने की अनुमति नहीं मिलेगी ।

रोगी : क्यों ? वे लोग घबड़ा रहे होंगे ।

नर्स : यह ICU है । यहाँ बाहरी लोगों के आने – जाने से संक्रमण का ख़तरा रहता है ।

रोगी : तो उनतक यह खबर पहुंचा दीजिये कि मैं बिलकुल ठीक हूँ । मुझे अब कोई परेशानी नहीं है । वे लोग मुझे अब घर वापस ले चले ।

नर्स:- आपको यहाँ से रिलीज करने के निर्णय डाक्टर बाबू लेंगे ।

रोगी: मैं तो अब बिलकुल ठीक हूँ । बेकार में यहाँ पड़े -पड़े क्या करू ?

नर्स : यदि आप पुस्तकों के शौक़ीन है तो आपको पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएँगी । आप पढ़ते रहना ।

रोगी : मुझे पुस्तकों में कोई रूचि नहीं है ।

नर्स:- कोई बात नहीं । यदि आप क्रिकेट में रूचि रखते हों तो महिला विश्व कप क्रिकेट का फाइनल मैच इंडिया और इंग्लैंड के बिच खेला जा रहा है । आप स्टाफ रूम में जाकर टीवी पर मैच देख सकते है ।

रोगी :- मुझे क्रिकेट में कोई रूचि नहीं है । मैं तो इसे खेल कि श्रेणी में ही नहीं रखता । पता नहीं क्यों लोग क्रिकेट के पीछे पागल हुए रहते है ।

नर्स: तो आप कौन सा खेल पसंद करते है ?

रोगी : मुझे शतरंज पसंद है ।

नर्स : शतरंज तो मुझे भी बहुत पसंद है लेकिन मुझे खेलना नहीं आता । अपना वार्ड बॉय धनञ्जय है न उसने मुझे शतरंज खेलना सिखाने का बहुत प्रयास किया लेकिन ये खेल मुझे पल्ले नहीं पड़ता है । मुझे राजा , हाथी , ऊंट , सिपाही कि चाल याद नहीं रहती । लेकिन धनञ्जय इस खेल में चैम्पियन है । वह कई पुरस्कार भी जित चुका है । आप कहे तो मैं उसे बुला देती हूँ। आपलोग चेस खेले । मन भी लगेगा और समय भी कट जाएगा ।

रोगी: मैं यहाँ चेस- वेस खेलने नहीं आया । डॉक्टर को बुलाओ मैं घर जाना चाहता हूँ । कहाँ है डॉक्टर बाबू ?

नर्स: वो तो निचे आपके परिवारजनों से बात कर रहे है ।

रोगी को आये दो घंटे बित चुके है । अब वह खुद को पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा है । वह अपने परिजनों से मिलकर बात करना और वापस जाना चाहता है । लेकिन उसे इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है ।

वहीँ अस्पताल के वेटिंग रूम रोगी के परिजनों से डॉक्टर बात कर रहे है । सभी परिजन बहुत घबड़ाये हुए लग रहे है ।

एक परिजन : डॉक्टर बाबू वो ठीक तो हो जायेंगे न ।

डॉक्टर:- अभी कुछ भी कहना मुश्किल है । अभी उन्हें हमने अपने गहन निगरानी कक्ष में रखा है । ४८ घंटा बीत जाने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है । बात सीने में दर्द की है । कुछ टेस्ट कराने होंगे । आप लोग पैसे का इंतज़ाम करके तुरंत जमा कर दे ताकि जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके ।

परिजन: डॉक्टर बाबू आप पैसे की चिंता ना करे हम एक- दो दिन में सारे पैसे का इंतज़ाम कर देंगे । आप इलाज शुरू कीजिये । उन्हें बचा लीजिये ।

डॉक्टर : फ़िलहाल आपलोग कल सुबह तक ४० हज़ार रूपये जमा करा दीजिये । कुछ जरुरी टेस्ट कराने होंगे तभी कुछ पता चल पायेगा ।

परिजन: हाँ, हाँ हम तुरंत इंतज़ाम करते है । आप जो भी टेस्ट है करिये ।

अगली सुबह रोगी के परिजन पैसे का इंतज़ाम कर अस्पताल पहुँचते है । वे रोगी से मिलना चाहते है है लेकिन बाहरी संक्रमण का हवाला देकर उन्हें नहीं मिलने दिया जाता । वे डॉक्टर से उनके केबिन में मिलते है । उनसे रोगी की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगते है । लेकिन डॉक्टर उन्हें पैसे जमा कराने को कहता है । रोगी के परिजन पुरे रूपये चुका देते है । अब उन्हें रोगी से मिलने की अनुमति मिलती है । दो परिजन पांचवे मंजिल पर रोगी के पास पहुँचते है । रोगी को बेड पर ना पाकर घबड़ा जाते है । नर्स से पूछने पर पता चलता है की वो स्वस्थ है और वार्ड बॉय के साथ शतरंज खेल रहे है । फिर उन्हें बुलाया जाता है । रोगी अपने को पूरी तरह से स्वस्थ बताते हुए अपने परिजनों से घर ले चलने का अनुरोध करता है । रोगी के परिजन इस सम्बन्ध में डॉक्टर से बात करने की बात कहकर वहां से सीधे डॉक्टर के चेंबर में पहुँचते है ।

परिजन : सर अब तो वो ठीक हो गए है । रिपोर्ट भी सब ठीक ही आया है । तो उन्हें रिलीज कर दीजिये ताकि हम उन्हें घर ले जा सकें ।

डाक्टर:- हाँ फ़िलहाल वो ठीक है । उनका ह्रदय सम्बन्धी सभी टेस्ट नार्मल है । जिसका हमलोग संदेह कर रहे थे वो नहीं है । लेकिन अचानक हुए इस दर्द को साधारण रूप में भी नहीं लिया जा सकता । इसलिए अभी एक- दो दिन और हमें उन्हें अपनी निगरानी में रखने होंगे । कुछ टेस्ट करने होंगें । यह एक्यूट एसिडिटी का भी केस हो सकता है । इसके कारण पेट में अल्सर होने का भय रहता है । इसलिए आपलोग २५ हज़ार रूपये जमा करा दीजिये । हम जांच के बाद आपको बता पाने में समर्थ होंगें की उन्हें रिजीज किया जाय या नहीं । अभी उन्हें हम रिजीज करने का ख़तरा नहीं मोल सकते ।

परिजन : आप जैसा जरुरी समझे वैसा करे । हम पैसे का इंतज़ाम करते है ।

परिजन काफी घबड़ाये थे ।

घर के बहुमूल्य सामान बेच देने के बाद भी १० हज़ार रूपये कम पड़ रहे थे । अतः परिजन के बेटे के इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए रखे रूपये से १० हज़ार ले कर २५ हज़ार पुरे किये गए ।

एडमिशन तो अगले साल भी हो सकता है लेकिन पिताजी को अल्सर हो गया तो ऑपरेशन कराने पड़ेंगे । जिसमे काफी खर्च आएगा । इसलिए ख़ुशी -ख़ुशी एडमिशन के पैसे को इलाज के लिए दे दिया गया ।

आज अस्पताल में पांचवा दिन है ।

सारे रिपोर्ट डॉक्टर के सामने रखे है । डॉक्टर साहब एक- एक कर रिपोर्ट देख रहे है । लेकिन कुछ बता नहीं रहे । इसलिए परिजनों के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है ।

कुछ छड़ों के पश्चात् डॉक्टर अपनी नज़रो को रिपोर्ट की ओर से हटाकर परिजनों की ओर करते है ।

डॉक्टर:- चिंता की कोई बात नहीं । मैंने सारे रिपोर्ट देख लिए । कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है । अब आप लोग उन्हें अपने घर ले जा सकते है । मैंने रिलीज करने को लिख दिया है ।

उनकी इस बात से परिजनों को राहत महसूस होती है । उनके चेहरे पर ख़ुशी झलकने लगती है । वे सब मन ही मन भगवान को शुक्रिया कहते है । लेकिन एक शंका के निदान वे डॉक्टर से कराना चाहते थे ।

परिजन:- डॉक्टर साहब, दर्द का कारण का कुछ पता चला ?

डॉक्टर : लगता है यह गैस के कारण हुआ था । मैंने गैस के लिए कुछ दवाइयां लिख दी है । १ महीने तक सुबह खाली पेट खिलाते रहना है ।

परिजन रोगी को ले जाने के लिए उसके पास पहुँचते है । लेकिन नर्स उन्हें निचे से NOC लाने को कहती है । जब वे इसे लेने के लिए निचे कैस काउंटर पर जाते है तब उन्हें २० हज़ार रूपये की बिल थमाई जाती है ।

परिजन : लेकिन हमने तो सारे पैसे चुकता कर दिए है ।

अकाउंटेंट: वो तो केवल जरुरी टेस्ट के बिल थे । अभी डॉक्टर की फ़ीस और बेड चार्ज बाकी है ।

परिजन बच्चे के इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए बचे बाकि पैसे को लाकर जमा करते है तब उन्हें NOC दिया जाता है ।

अब परिजनों को रोगी को घर ले जाने में कहीं कोई दिक्क्त नहीं है ।

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