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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



गीत -
समझो यहाँ पर स्वर्ग मिले


डॉ० अनिल चड्डा


 		 
जीवन में संघर्ष मिले तो,
समझो यहाँ पर स्वर्ग मिले।
फूलों संग कांटें न हों तो,
चमन कहो कैसे ये खिले।। 

रफ्ता-रफ्ता राह बने है,
कदम उठा के जब भी चलें हैं,
राहों के पत्थर खुद ही हटेंगे,
जीवन में सब साथ चलेंगे,
नेकी की राह को भूलने वाले,
जीत से कैसे गले मिलें।

दोस्त रहें न, रिश्ते खो जाते,
पग-पग पर ठोकर हैं खाते,
जो दिन हँसते-गाते बीते,
कहाँ से हम वो दिन फिर लाते,
रात रुके न, दिन उजला आये,
अपनी राह हम चलते चलें।
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