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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



बारिश बरसे


डॉ० अनिल चड्डा


 
टप, टप, टप, टप, टपप, टपप,
बारिश बरसे टप, टप, टप,
गरजे बदरा घनन, घनन,
बिजली चमके शनन, शनन।

देख के बारिश की बौछार,
झूमें पौधे बारम्बार,
सूखे से छुटकारा मिला है,
नदियाँ भी मारें फुँकार ।

चहुँ और हरियाली बिछी है,
ठंडी हवा की धूम मची है,
कोयल मीठे गान सुनाये,
जंगल में मंगल की घड़ी है ।

मोर खुशी से नाच दिखाये,
बगिया भी है फूल खिलाये,
आओ, हम सब हाथ पकड़ कर,
झूमें, नाचें, मौज मनायें ।
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