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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



19 कहानीकारों द्वारा रचित प्रेम कहानियों का संकलन


“जयपुर प्रीत की बाँहों में” का लोकार्पण


स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान जयपुर एवं राही सहयोग संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 19 साहित्यकारों के कहानी संकलन “जयपुर,प्रीत की बाँहों में”,संपादक श्री प्रबोध कुमार गोविल का लोकार्पण आज दिनांक 25.07.2018 को सायं 5बजे,होटल ग्रैंड उनियारा में प्रो.पवन सुराणा,श्री नन्द भारद्वाज,डॉ.ममता शर्मा,डॉ.दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ,प्रो.प्रबोध कुमार गोविल एवं नीलिमा टिक्कू द्वारा किया गया

आरम्भ में स्पंदन संस्थान की अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रेम के विविध रूपों को दर्शाती 19 खूबसूरत कहानियों का यह ऐसा अनूठा संकलन है जिसमें लेखकों ने प्रेम को अपने अनुभवों-कल्पनाओं में पिरो कर बेहद खूबसूरत अंदाज़ में इस तरह से गढ़ा है कि हर कहानी अपने अलग अंदाज़ में एक नयी प्रेम की दास्ताँ ,बड़े ही रोचक-मार्मिक ढंग से व्यक्त करती हुई पाठक के मन को छू जाती है, और संग्रह के शीर्षक “जयपुर प्रीत की बाँहों में” को सार्थक करती है इस अनूठी पुस्तक के सम्पादन के लिए श्री प्रबोध कुमार गोविल को हार्दिक बधाई

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नन्द भारद्वाज ने कहा कि ये किताब जिस योजना के लिए बनायी गयी है वह काफ़ी दिलचस्प है.इसमें स्थान विशेष की कथा के क्षेत्र में काम करने वाले कहानीकारों को एक मंच पर लाना उन्हें चर्चित करना,बढ़ावा देना श्लाघनीय है.इसमें वर्णित 19 साहित्यकारों में से 10 साहित्यकार जयपुर के हैं.संग्रह की ख़ास बात यह है कि इसमें नये-पुराने कहानीकारों के चयन में भेदभाव नहीं किया गया है . इससे हमें सभी को जानने का मौक़ा मिलता है.

डॉ.ममता शर्मा ने संग्रह की कहानियों पर चर्चाकरते हुए कहा कि ये सभी कहानियाँ प्रेम सम्बंधों की अपने समय-काल को दर्शाती अलग-अलग कहानियाँ हैं जिन्हें सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है

डॉ.दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने अपने बीज वक्तव्य में कहानियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि प्रेम कहानी संकलन बहुत से आये हैं लेकिन इस संकलन की विशेषता यह है कि इसमें दो चीज़ें केन्द्र में रखी गयी हैं एक ‘जयपुर’शहर और दूसरा ‘प्रेम.इनको लेकर 19 साहित्यकारों ने जो रोचक कहानियाँ बुनी हैं उनमें प्रेम को एक नये आलोक में देखने का अवसर मिलेगा. पुस्तक पर श्री राजेश मोहन शर्मा(प्रिंसिपल महावीर स्कूल),,डॉ.मथुरेशनन्दन कुलश्रेष्ठ(अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद जयपुर),डॉ.सुदेश बत्रा,कविता मुखर ने अपने विचार रखे..

प्रबोध कुमार गोविल ने बताया कि इस संकलन का विचार ख्वाजा अहमद अब्बास के जन्मदिन के अवसर पर दोस्तों के आपसी विमर्श के दौरान आया। अब्बास का प्रेम चर्चा का विषय था ,ऐसे में हमने उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हीं के एक प्रसिद्ध उपन्यास “बंबई रात की बाँहों में” से इस किताब का शीर्षक उठा लिया.प्रेम का शरीर से कोई लेना-देना नहीं .ये एक खिलाड़ी का अपने कोच से हो सकता है,सेठ का अपने विश्वासपात्र मुनीम से ,शिक्षक का छात्र से और एक रिक्शे वाले का अपनी सवारी से भी. इस संकलन में सम्मिलित कुछ रचनाकार देश के ख्याति प्राप्त कहानीकार है इसलिए इस संग्रह में शामिल कहानियों पर किसी टीका-टिप्पणी की ज.रूरत नहीं समझी गई है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो.पवन सुराणा ने कहा कि महान जर्मन कवि गोथे के अनुसार प्यार पाना जीवन को उमंगों से भरता है तो प्यार से वंचित रहना जीवन को निर्रथक कर देता है.प्रेम को केन्द्रित कर लिखी गई ये 19 कहानियाँ अभिव्यक्ति और शिल्प की दृष्टि से परिपक्व ऐसी कहानियाँ हैं जो पाठक को कभी सावधान करती हैं तो कभी उसका ह्रदय प्रेम की अनुभूति से सरोबार कर उसे आल्हादित करती हैं.कुछ कहानियाँ अप्राप्य प्रेम को देखकर पाठक के मन में एक समाधान ढूँढने की कोशिश भी करती है.संग्रह की कुछ कहानियों को रेखांकित करते हुए साहित्यकारों की रचना शिल्प की सराहना करते हुए सभी 19 साहित्यकारों को तथा संग्रह के कुशल संपादन के लिए साहित्यकार श्री प्रबोध कुमार गोविल को हार्दिक बधाई दी.

मंचस्थ अतिथियों को स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू द्वारा प्रतीक चिन्ह प्रदान किये.संग्रह में सम्मिलित सभी रचनाकारों को राही सहयोग संस्थान द्वारा पुस्तक की पाँच प्रतियाँ भेंट की गई.

सभागार में साहित्य जगत एवं विविध क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों डॉ.मथुरेशनन्दन कुलश्रेष्ठ,श्री ईशमधु तलवार,श्री फ़ारूक़ आफ़रीदी , श्री अशोक राही,डॉ.लक्ष्मी शर्मा,श्रीरिझवाणी,डॉ.वीना अग्रवाल,प्रो.लाडकुमारी जैन,डॉ.जयश्री शर्मा,एस भाग्यम शर्मा,रेणु शर्मा,कविता मुखर,शिवानी शर्मा,डॉ.कविता रायज़ादा ,रंजना त्रिखा ,श्री चाँद मोहम्मद,रजनी मोरवाल ,रतनकुमार साँभरिया,योगेश कानवा,श्री रमेश खत्री,पावना जी खत्री ,राज चतुर्वेदी,सहित गणमान्य श्रोता विद्यमान रहे.

अतिथियों का आभार प्रो.प्रबोध कुमार गोविल द्वारा ज्ञापित किया गया.कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशा शर्मा ने किया.


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