Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



खुद से नाराज हो मिलेगा क्या


डॉ० अनिल चड्डा


 
खुद से नाराज हो मिलेगा क्या,
होके बर्बाद यूँ मिलेगा क्या।

अश्क कहते रहे ज़माने से,
सिला हमको कोई मिलेगा क्या।

दिल ने ता-उम्र ठोकर खाई है,
ठीयाँ इसको कभी मिलेगा क्या।

जख्मों से रिश्ता हो ही गया,
आराम मरहम से मिलेगा क्या।

प्यास बुझाती रही रात की शबनम,
‘अनिल’ को सहर में मिलेगा क्या।

 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें