Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



बूँद का अस्तित्व


उत्तम टेकडीवाल


    
लो फिर बरस पड़ी बारिश की बूँदें
अस्तित्व को अपने वो मिट्टी में ढूँढ़े

साहस किया था विराट उसने
सागर का  दामन छोड़ कर
किरनों की सीढ़ीयाँ चढ कर
पुरवाई के पँखों पर उड़ कर
बादलों की श्वेत पालकी चढ़े

मिट्टी ने कीर्तन किया इस तरह
हुआ गौन समक्ष राधा का विरह
ज्ञान पर हावी है प्रेम की जिरह
भक्ति से मिलन की तृष्णा बढ़े

सोख लिया प्रेम की तपिश ने
रस सारे जो संजोए थे बूँद ने
बूँद बूँद न रहा, माटी बन बहा
खुद को खो कर नई पहचान गढ़े

वो बीज जो जीना भूल चुका था
जाने किस आस में अब तक रुका था
जाने किस ने उसकी पुकार सुनी
जाने किस ने,कितने, कब अरदास पढ़े

बीज अँकुर बन जब लहराया
जीवन का झंडा फिर फहराया
सारे अहम् समाए सृजन कुँड में
अद्वैत रूप लिए केवल ब्रम्ह थे खड़े

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें