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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



तुम यानी e= mc2


अशोक कुमार शुक्ला


तू कौन है?
जिंदगी क्या है?
शायद पदार्थ के 
विघटन की प्रक्रिया
जिसमें पदार्थ ने
बदल दिया है बस अपना रूप
सृजनकर्ता को
याद आ सकते है वो पल
जब उत्साह, उमंग, जोश,
समर्पण, लाज, जैसी
समस्त उर्जाऐं
अपना रूप बदलकर
आइस्टीन के
जग प्रसिद्ध सिद्धांत
पदार्थ-उर्जा के सम्बन्ध
e= mc2 को
चरितार्थ करने के लिए
सिमट गयी थी।
और….
समूची उर्जा ने
एकाकार होकर
पदार्थ का रूप धारण कर लिया था
पदार्थ ….!
जिसमे ‘तुमने’
प्राण विकसित किये
सचमुच….!
जादू जानती हो तुम…! 
          

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