Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



जब से हमारी सोच के पैकर बदल गये


अजय अज्ञात


 
जब से हमारी सोच के पैकर बदल गये 
तब से निशातो क़ैफ़ के मन्ज़र बदल गये 
अह्सास के वो नर्म से बिस्तर बदल गये 
इक शब के साथ साथ गुले तर बदल गये 
दुनिया ने पहले लूट ली क़ुद्रत की आबरू 
फ़िर यों हुआ कि वक़्त के तेवर बदल गये 
फ़िक्रे सुख़न में ख़ून जलाता है कौन अब
बदला मिज़ाजे दौर सुख़नवर  बदल गये 
कोई किसी को भी नहीं पहचान पा रहा 
अज्ञात सब के काँधो पे हैं सर बदल गये		 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें