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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



अकथ पीड़ा*


कमला घटाऔरा


संध्या का आगमन जान सूर्य देव क्षितिज की ओर बढ़ गये थे । चारों ओर रक्तिम आभा बिछ गई थी।मुझे बाजार से कुछ लाना था ।बिजली का कट लगने से पहले वापस आना चाहती थी । सड़क पर बसों ,स्कूटरों , साइकिल वालों और पैदल चलने वालों की भीड़ के कारण चलना दूभर हो रहा था । उस भीड़ में मेरी आँखे अचानक एक दृष्य पर अटक गईं ।रास्ते में कोई व्यक्ति गाय को रस्से से बांधे खींचे लिये जा रहा था। गाय की गीली आँखों से छलकती बेबसी मुझे अपनी ओर खींचे बिना न रह सकी ।जैसे उसे उसके बच्चों से दूर ले जाया जा रहा हो ।उस की आँखे इतनी भीगी क्यों हैं ? ग़लत तो नहीं होने जा रहा इसके साथ । मन शंकित हो गया ।जानवर अपने पर या औरों पर आने वाले संकट को मनुष्यों से पहले अधिक आसानी से पहचान लेते हैं । मन उदास सा हो गया ।मानों वह एक पशु न होकर एक मनुष्य हो । जैसे कोई नारी हो जो अपनी जीवन गाथा सुना गई हो ।नारी भी पति के लड़ लगी इसी तरह सुसराल आती है ,लेकिन यह नहीं जानती उसके साथ कब कैसा व्यवहार होगा । मुझे याद आया मेरी दादी माँ को गाय पालने की बहुत चाह थी ।उन के मायके में दुधारू पशु हमेशा रहे थे ।मेहमानों का स्वागत गर्मागर्म दूध पिला कर करते ।तब चाय का इतना चलन नहीं था । पिता जी ने आर्थिक तंगी के बावजूद माँ को गाय ला कर जो खुशी दी थी आज भी मेरी आँखों के सामने घूम रही है । लेकिन आज इस गौ माता को देख कर अजीब सी अनुभूति हुई है । और मन बेचैनी सी महसूस करने लगा । मैं सोचने लगी क्या धरती पर हर जीव सिर्फ दुख ही भोगने आता है ।या फिर उसकी सृष्टि को सजाने अथवा दु:ख सुख की अनुभूति को रूप देने । मैं फिर सोच के गलियारों में चली गई ,कहीं उसे कसाई के पास तो नहीं ले जाया जा रहा । दूधारू न रहने पर वह पालक के लिये काम की नहीं रह जाती । माता का दर्जा देकर भी हम यह काम करते नहीं झिझकते जैसे अपने वृद्ध माता पिता को ओल्ड होम में डालते समय हम अपना ही स्वार्थ और सुख चैन सोचते है । उपयोगिता अपनों की खतम होते ही कितने निर्मम हो जाते हैं हम । हृदय में छुपी पीर इन्सानों की ही नहीं ,जीवों की भी पिघल कर आँसुओं के रूप में बाहर आ जाती है -

 
अकथ पीड़ा 
छुपा न पाये कोई
कह दें आँखें ।

मानव जाग 
बोलें जो नम आँखें 
उसे भी सुन ।



 

*हाइबन - एक जापानी काव्यविधा का रूप है । इसमें काव्यमय गद्य के अन्त में एक हाइकु का प्रयोग होता है ।जो लिखत को पूर्णता देता है ।


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